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इंदौर

10 साल बाद खुला पदोन्नति का रास्ता, इंदौर में 9 कर्मचारियों को मिला सहायक ग्रेड-3 का दर्जा

राजवाड़ा दर्पण
राजवाड़ा दर्पण
10 साल बाद खुला पदोन्नति का रास्ता, इंदौर में 9 कर्मचारियों को मिला सहायक ग्रेड-3 का दर्जा

कलेक्टर ने नए पदोन्नति नियम-2025 के तहत जारी किए आदेश

इंदौर। लंबे समय से रुकी हुई पदोन्नति प्रक्रिया को इंदौर में फिर से गति मिल गई है। कलेक्टर शिवम वर्मा ने मध्यप्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम-2025 के प्रावधानों के अनुसार 9 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को सहायक ग्रेड-3 के पद पर पदोन्नत करने के आदेश जारी किए हैं। यह आदेश 28 जुलाई से प्रभावी हो गया है। पदोन्नत सभी कर्मचारी फिलहाल अपने वर्तमान कार्यस्थल पर ही सहायक ग्रेड-3 के पद का कार्यभार संभालेंगे।

     कलेक्टर कार्यालय से जारी आदेश के अनुसार यह पदोन्नति 27 जुलाई को आयोजित विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठक में की गई अनुशंसाओं के आधार पर प्रदान की गई है। हालांकि, यह पदोन्नति अंतिम रूप से सुप्रीम कोर्ट में लंबित विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी-13954/2016) तथा उच्च न्यायालय में विचाराधीन संबंधित मामलों के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगी। न्यायालय के अंतिम फैसले के अनुसार आवश्यकता पड़ने पर पदोन्नति से जुड़े आदेशों में संशोधन या अन्य कार्रवाई की जा सकेगी।
      आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि सभी पदोन्नत कर्मचारियों को 2 वर्ष की परीक्षण अवधि पूरी करनी होगी। यदि इस दौरान किसी कर्मचारी के विरुद्ध विभागीय जांच, लोकायुक्त में प्रकरण या किसी न्यायालय में मामला लंबित पाया जाता है अथवा उसकी शैक्षणिक योग्यता निर्धारित मापदंडों के अनुरूप नहीं मिलती है, तो उसकी पदोन्नति स्वतः निरस्त मानी जाएगी।
इन्हें मिला पदोन्नति का लाभ
      पदोन्नति पाने वाले कर्मचारियों में आनंद देलवार, सुरेंद्र कुमार पटेल, आनंद माली, पूजा गुप्ता, पूनम गौड़, जितेंद्र कुमार गौर, हरिओम डांगी, नेहा ठाकुर और अस्मिता सुखदेवे शामिल हैं। सभी कर्मचारियों को पे मैट्रिक्स लेवल-4 के अंतर्गत ₹19,500 से ₹62,000 तक के वेतनमान का लाभ मिलेगा।
     कलेक्टर कार्यालय ने आदेश में यह भी उल्लेख किया है कि वेतन निर्धारण, आरक्षण संबंधी प्रावधान तथा पदोन्नति की पूरी प्रक्रिया राज्य शासन के निर्देशों और मध्यप्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम-2025 के अनुरूप लागू की गई है। इस निर्णय को लंबे समय से पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण प्रशासनिक पहल माना जा रहा है, क्योंकि लगभग 10 वर्षों से पदोन्नति की प्रक्रिया विभिन्न कारणों से प्रभावित रही थी।

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