इंदौर। मोबाइल की स्क्रीन पर आया एक संदेश... कुछ ही मिनटों में खाते से रकम गायब... और जब पीड़ित शिकायत लेकर पुलिस के पास पहुंचता है तो जांच बैंक खाते तक पहुंचती है। एरोड्रम थाना पुलिस की जांच में इस बार कहानी कुछ और निकली। जिस खाते को सामान्य बैंक खाता समझा जा रहा था, उसी में करोड़ों रुपये का संदिग्ध लेनदेन हो रहा था। पुलिस ने ऐसे ही खातों के पीछे सक्रिय नेटवर्क की परतें खोलते हुए दो अलग-अलग मामलों में 16 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
पहले मामले की शुरुआत ₹1.44 लाख की साइबर ठगी की शिकायत से हुई। पुलिस ने संबंधित बैंक खातों के लेनदेन की तकनीकी जांच शुरू की। खाते की गतिविधियां सामने आईं तो पुलिस भी चौंक गई। महज एक महीने में करीब ₹3.42 करोड़ का संदिग्ध ट्रांजेक्शन मिला।
जांच में सामने आया कि कुछ लोग कमीशन के लालच में अपने या दूसरों के बैंक खाते उपलब्ध करा रहे थे। इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी, ऑनलाइन सट्टे और गेमिंग से जुड़ी रकम को इधर-उधर करने के लिए किया जा रहा था। यही खाते देश के अलग-अलग राज्यों में दर्ज 200 से ज्यादा साइबर फ्रॉड शिकायतों से भी जुड़े पाए गए।
पुलिस ने इस मामले में छह आरोपियों को गिरफ्तार किया। उनके कब्जे से 34 एटीएम/डेबिट कार्ड, 24 चेकबुक, 12 पासबुक, आठ मोबाइल फोन, एक वाई-फाई राउटर और ₹1.08 लाख नकद बरामद हुए। बैंकिंग संबंधी जानकारी वाली डायरी भी जांच के लिए महत्वपूर्ण कड़ी बनी।
दूसरी कहानी क्रिप्टो करेंसी में निवेश के नाम पर हुई ₹17.84 लाख की ठगी से शुरू हुई। NCRP पोर्टल, बैंक खातों और तकनीकी साक्ष्यों को जोड़ते हुए पुलिस आरोपियों तक पहुंची। इस मामले में 10 आरोपी गिरफ्तार किए गए। पूछताछ में सामने आया कि यहां भी कमीशन के बदले बैंक खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम के लेनदेन और निकासी में किया जा रहा था।
पुलिस ने दोनों मामलों में गिरफ्तार आरोपियों से जुड़े अन्य बैंक खातों और सहयोगियों की जानकारी जुटाना शुरू कर दिया है। जांच का दायरा अब उन लोगों तक पहुंच रहा है, जो पर्दे के पीछे रहकर खातों की व्यवस्था करते थे।
एक खाते से शुरू हुई पड़ताल ने करोड़ों के लेनदेन और सैकड़ों शिकायतों से जुड़े नेटवर्क का रास्ता खोल दिया है। अब पुलिस की नजर उन कड़ियों पर है, जहां से इस पूरे खेल को संचालित करने वाले चेहरे सामने आ सकते हैं।