45 से अधिक नाती-पोतों वाले परिवार की सबसे बुजुर्ग सदस्य, आज भी खुद करती हैं दैनिक कार्य; मजबूत याददाश्त बनी मिसाल
खामगांव। आधुनिक जीवनशैली और बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं के दौर में खामगांव की सीताबाई शंकरराव वानखेडे स्वस्थ और लंबी उम्र का प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आई हैं। 105 वर्ष की आयु पूरी कर चुकी सीताबाई आज भी स्वस्थ हैं और अधिकांश दैनिक कार्य स्वयं करती हैं। परिवार के लोग इसे ईश्वर का आशीर्वाद और अनुशासित जीवनशैली का परिणाम मानते हैं।
हरी का फैल क्षेत्र निवासी सीताबाई रोज सुबह जल्दी उठती हैं, स्नान करती हैं और अपनी दिनचर्या स्वयं निभाती हैं। उम्र के इस पड़ाव पर भी उनकी याददाश्त मजबूत है। हड्डी टूटने के बाद अब वे वॉकर के सहारे चलती हैं, लेकिन आत्मनिर्भरता आज भी बरकरार है। खास बात यह है कि उन्हें ब्लड प्रेशर, शुगर जैसी कोई गंभीर बीमारी नहीं है।
सीताबाई का परिवार भी काफी बड़ा है। उनके सात बेटे, पांच बेटियां और 45 से अधिक नाती-पोते हैं। परिवार के कई सदस्य सरकारी और सार्वजनिक उपक्रमों में वरिष्ठ पदों पर सेवाएं देकर सेवानिवृत्त हो चुके हैं। सभी उनके अनुभव और आशीर्वाद को परिवार की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।
परिवार का कहना है कि सीताबाई का सादा खान-पान, नियमित दिनचर्या और सकारात्मक सोच ही उनकी लंबी एवं स्वस्थ आयु का सबसे बड़ा राज है। 105 वर्ष की उम्र में भी उनका उत्साह नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बना हुआ है।