धार। करीब 120 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा सुनारखेड़ी रेलवे ओवरब्रिज पहली ही बारिश में गुणवत्ता की परीक्षा में फेल होता नजर आ रहा है। पुल पर कई जगह डामर उखड़ गया है, गहरे गड्ढे बन गए हैं और गिट्टी उड़ने से वाहन चालकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। इंदौर-अहमदाबाद मार्ग के इस व्यस्त पुल से रोजाना हजारों वाहन गुजरते हैं, लेकिन अब यह सफर जोखिम भरा बन गया है।
बारिश के बाद ठेकेदार ने पैचवर्क कर हालात सुधारने की कोशिश की, लेकिन 27 जून को किया गया मरम्मत कार्य दो दिन भी नहीं टिक सका। पहली तेज बारिश के साथ ही डामर की परत फिर उखड़ गई। इससे निर्माण गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। फिलहाल फिर से पैचवर्क किया जा रहा है, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि यह स्थायी समाधान नहीं, बल्कि खानापूर्ति है।
अधिकारियों का कहना है कि डामर के रखरखाव पर अधिक खर्च आता है, इसलिए अब पुल पर सीमेंटेड लेन विकसित करने की तैयारी की जा रही है। हालांकि सवाल यह उठ रहा है कि यदि यह विकल्प बेहतर था तो इसे शुरुआती योजना में ही क्यों नहीं अपनाया गया।
पुल पर दोनों दिशाओं का ट्रैफिक फिलहाल एक ही लेन से गुजर रहा है। वहीं पांच-छह इंच ऊंचे पैचवर्क के कारण दोपहिया वाहन चालकों के लिए दुर्घटना का खतरा बढ़ गया है, खासकर रात के समय।
स्थानीय लोगों ने निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराकर दोषी ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है। उधर, ओवरब्रिज की बदहाल स्थिति के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद परियोजना की गुणवत्ता और कार्यप्रणाली पर भी सवाल तेज हो गए हैं।