एफपीपीएएस 20% से ज्यादा हुआ तो एक साथ वसूली नहीं, दो महीने तक किस्तों में ले सकेंगे डिस्कॉम
भोपाल। प्रदेश के करीब 1.30 करोड़ घरेलू बिजली उपभोक्ताओं को बिजली बिल में अचानक होने वाली बड़ी बढ़ोतरी से राहत मिल सकती है। विद्युत नियामक आयोग ने प्रस्तावित मल्टी ईयर टैरिफ रेगुलेशंस-2026 में फ्यूल एंड पावर पर्चेस एडजेस्टमेंट सरचार्ज (एफपीपीएएस) की वसूली के नियम बदलने का प्रस्ताव रखा है।
प्रस्ताव के मुताबिक, यदि किसी महीने एफपीपीएएस स्वीकृत ऊर्जा शुल्क के 20% से अधिक हो जाता है तो बिजली वितरण कंपनी पूरी अतिरिक्त राशि एक ही बिल में नहीं वसूल सकेगी। 20% से ऊपर की राशि को अधिकतम दो महीने तक आगे बढ़ाकर चरणबद्ध तरीके से वसूला जा सकेगा। इससे ईंधन और बिजली खरीद की लागत अचानक बढ़ने पर उपभोक्ताओं के मासिक बिल पर पड़ने वाला झटका कम होगा।
हालांकि, इसका मतलब बिजली सस्ती होना नहीं है। एफपीपीएएस की गणना वास्तविक ईंधन और बिजली खरीद लागत के आधार पर होती रहेगी। लागत बढ़ने पर सरचार्ज भी बढ़ सकता है, लेकिन उसका पूरा अतिरिक्त भार एक ही महीने के बिल में डालने के बजाय आगे के महीनों में बांटा जा सकेगा।
अभी सुझाव-आपत्तियां मांगी गईं, 1 अप्रैल 2027 से लागू होने की संभावना
नियामक आयोग ने प्रस्तावित नियमों का ड्राफ्ट सुझाव और आपत्तियों के लिए जारी किया है। अंतिम नियम अधिसूचित होने के बाद इनके 1 अप्रैल 2027 से लागू होने की संभावना है। प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य बिजली की दर कम करना नहीं, बल्कि बिल में अचानक आने वाले बड़े उछाल को नियंत्रित करना है।
20% की सीमा के बाद अतिरिक्त राशि आगे बढ़ेगी
नए प्रस्ताव में एफपीपीएएस की ऊपरी सीमा को महत्वपूर्ण माना गया है। यदि किसी महीने ईंधन और बिजली खरीद की लागत बढ़ने से एफपीपीएएस स्वीकृत ऊर्जा शुल्क के 20% से ज्यादा हो जाता है, तो डिस्कॉम को पूरी राशि तत्काल उपभोक्ता से लेने की अनुमति नहीं होगी। 20% से ऊपर की राशि को अधिकतम दो महीने में वसूला जा सकेगा।
इससे उन महीनों में उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी, जब बिजली उत्पादन या बिजली खरीद की लागत अचानक बढ़ जाती है। यानी बिजली की वास्तविक लागत का असर खत्म नहीं होगा, लेकिन उसका बोझ एक साथ पड़ने के बजाय चरणबद्ध तरीके से आएगा।