देवास पुलिस ने 63.52 लाख की ठगी का नेटवर्क तोड़ा, 54.84 लाख रुपए बरामद; 19 टीमों ने 58,315 किमी दौड़कर दबिश दी
देवास। डिजिटल अरेस्ट के नाम पर सेवानिवृत्त अधिकारी से 63.52 लाख रुपए की साइबर ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का देवास पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने नेटवर्क से जुड़े 12 आरोपियों को गिरफ्तार कर 54.84 लाख रुपए की ठगी की राशि जब्त की है। आरोपियों की धरपकड़ के लिए पुलिस की 19 टीमों ने राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, उत्तरप्रदेश, दिल्ली समेत 17 राज्यों के 33 जिलों में दबिश दी।
127 दिन, 58 हजार किमी और लगातार पीछा
मामला सनफार्मा दवा कंपनी के एक सेवानिवृत्त अधिकारी से जुड़ा है। आरोपियों ने दूरसंचार विभाग, मुंबई क्राइम ब्रांच और सीबीआई अधिकारी बनकर फोन और वीडियो कॉल किए। मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने और गिरफ्तारी का डर दिखाकर बैंकिंग व निवेश संबंधी जानकारी हासिल की। इसके बाद जांच के नाम पर अलग-अलग खातों में रकम ट्रांसफर कराकर 63.52 लाख रुपए ठग लिए।
शिकायत मिलने के बाद कोतवाली पुलिस ने बैंक ट्रांजेक्शन, मोबाइल नंबर, बैंक स्टेटमेंट, सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों की कड़ियां जोड़ना शुरू किया। बैंकिंग नेटवर्क का पीछा करते हुए पुलिस टीमें 127 दिनों में करीब 58,315 किलोमीटर का सफर तय कर आरोपियों तक पहुंचीं।

20 हजार से 21 लाख तक की रकम बरामद
पुलिस ने भूराराम राव, भालाराम मेघवाल, नाजिम खान, थोटकुरा हर्षवर्धन साई नरसिंह वर्मा, वैभव शुक्ला, मुकराला मेघा अविनाश, आयुष गुप्ता, केयूर कुमार, कमल कांति, मोहम्मद अब्दुल्ला, अनिल कुमार और गिरीश कुमार येलेंटी को गिरफ्तार किया। आरोपियों से अलग-अलग स्थानों पर 20 हजार से 21 लाख रुपए तक की रकम, चेकबुक, एटीएम और मोबाइल बरामद किए गए।
एसपी पुनीत गेहलोद के निर्देशन में गठित टीम ने यह कार्रवाई की। एडीजी उज्जैन जोन राकेश गुप्ता और डीआईजी उज्जैन रेंज नवनीत भसीन के निर्देश पर कार्रवाई को अंजाम दिया गया। तत्कालीन एएसपी जयवीरसिंह भदौरिया, वर्तमान एएसपी गजेन्द्र सिंह वर्धमान, सीएसपी सुमित अग्रवाल और टीआई श्यामचंद्र शर्मा के मार्गदर्शन में पुलिस टीम ने नेटवर्क की कड़ियां खंगालीं।
पुलिस बोली- डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई वैधानिक प्रक्रिया नहीं
देवास पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि कोई पुलिस, सीबीआई, ईडी, नारकोटिक्स या अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बनकर फोन अथवा वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी या मनी लॉन्ड्रिंग के नाम पर डराए और पैसे मांगे तो राशि ट्रांसफर न करें। साइबर ठगी होने पर तत्काल 1930 पर शिकायत करें या नजदीकी पुलिस थाने से संपर्क करें।