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इंदौर

300 सीढ़ियां उतरकर ‘मालवा के छोटे अमरनाथ’ पहुंचे राइडर्स, फिर 15 किमी कीचड़-पत्थरों में दौड़ी बाइकें  

राजवाड़ा दर्पण
राजवाड़ा दर्पण
300 सीढ़ियां उतरकर ‘मालवा के छोटे अमरनाथ’ पहुंचे राइडर्स, फिर 15 किमी कीचड़-पत्थरों में दौड़ी बाइकें

 

160 किमी की मानसून राइड में जंगल, पहाड़, नदी और ऑफ-रोडिंग का रोमांच; 19 बाइक पर निकले राइडर्स ने कुशलगढ़ किला और खोदरा महादेव के किए दर्शन

300 सीढ़ियां उतरकर ‘मालवा के छोटे अमरनाथ’ पहुंचे राइडर्स, फिर 15 किमी कीचड़-पत्थरों में दौड़ी बाइकें

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इंदौर। बारिश की फुहारें, घने जंगल, पहाड़ी रास्ते और कीचड़ से भरी पगडंडियां... रविवार को विजयंत वेंचर क्लब की पहली मानसून राइड में रोमांच का ऐसा सफर देखने को मिला, जिसमें प्रकृति, आस्था और एडवेंचर का अनूठा संगम रहा। करीब 160 किमी की राइड में 19 मोटरसाइकिलों पर दो-दो की जोड़ी में राइडर्स इंदौर से निकले और चोरल रेंज के जंगलों से होते हुए कुशलगढ़ किला और ‘मालवा के छोटे अमरनाथ’ कहे जाने वाले खोदरा महादेव पहुंचे।

  सुबह 8 बजे नाश्ता और चाय के बाद सभी राइडर्स ने अपनी बाइक का तेल, हवा और पानी जांचा। हेलमेट पहनकर राइड शुरू हुई। क्लब के ‘पाथ फाइंडर’ और चलते-फिरते गूगल कहे जाने वाले श्रीकांत  व कुणाल ने काफिले को लीड किया। महू-मलेंडी होते हुए राइडर्स चोरल के घने और हरे-भरे जंगलों से गुजरे। पहला पड़ाव कुशलगढ़ का ऐतिहासिक किला रहा। 16वीं शताब्दी में जमींदार कुशलसिंह राजपूत द्वारा बनवाया गया यह दुर्ग आज भी अपनी ऊंचाई और इतिहास के लिए आकर्षण का केंद्र है।

    इसके बाद काफिला खोदरा महादेव पहुंचा। यहां करीब 300 सीढ़ियों की खड़ी उतराई और फिर उतनी ही चुनौतीपूर्ण चढ़ाई करनी थी। राइडर्स ने पहले चाय, पकौड़े, मैगी, गन्ने का रस, ककड़ी और केले से ऊर्जा जुटाई। भगवान शिव के दर्शन के बाद नींबू पानी पीकर सभी ने चढ़ाई पूरी की।

15 किमी ऑफ-रोडिंग ने लिया असली इम्तिहान

       इसके बाद राइड का सबसे रोमांचक दौर शुरू हुआ। करीब 15 किमी तक कीचड़, पत्थर, गड्ढों, फिसलन और कच्ची पगडंडियों से बाइक निकालना चुनौती बन गया। कई जगह रास्ता इतना कठिन था कि साथी राइडर को बाइक से उतरकर पैदल चलना पड़ा और चालक को अकेले बाइक निकालनी पड़ी। एक तरफ ऊंचे पहाड़ और दूसरी ओर गहरी खाई के बीच हर मोड़ रोमांच बढ़ाता रहा।

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शाम करीब 4 बजे राइडर्स चोरल नदी के एक सुरक्षित जलस्थल पर पहुंचे। यहां करीब आधे घंटे तक ठंडे पानी में जलक्रीड़ा का आनंद लिया। इसके बाद चोरल गांव स्थित बलराज ढाबा-रिसोर्ट पर भोजन किया गया।

     कांवड़ यात्रियों और रविवार की भीड़ के चलते वापसी के अंतिम 40 किमी में जाम और ट्रैफिक ने रफ्तार धीमी कर दी। शाम करीब 7 बजे सभी राइडर्स सुरक्षित इंदौर लौटे। क्लब के प्रताप दूबे ने बताया कि यह राइड प्रकृति, आस्था, रोमांच और दोस्ती से भरा ऐसा अनुभव रही, जिसे सदस्य लंबे समय तक याद रखेंगे।

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