इंदौर। नगर निगम परिषद के चार वर्ष पूरे होने पर आयोजित प्रेसवार्ता में महापौर पुष्यमित्र भार्गव और एमआईसी सदस्यों ने अपने कार्यकाल की उपलब्धियां गिनाईं। महापौर ने कहा कि 2022 में परिषद बनने के समय उन्होंने "क्लीन इंदौर, ग्रीन इंदौर और डिजिटल इंदौर" का संकल्प लिया था और अब इन तीनों क्षेत्रों में शहर तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि अगले पांच वर्षों में ऐसा इंदौर तैयार करने की दिशा में काम हो रहा है, जो आने वाले 25 वर्षों की जरूरतों को पूरा कर सके।
महापौर ने बताया कि नगर निगम का एकीकृत डिजिटल पोर्टल अंतिम चरण में है। इसके माध्यम से निगम के सभी विभागों की जानकारी और सेवाएं एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होंगी। इंदौर देश का पहला नगर निगम बन गया है जिसने डिजिटल एड्रेस व्यवस्था शुरू की है। वहीं योजना शाखा के माध्यम से वार्डों की डिजिटल प्लानिंग पर भी तेजी से काम चल रहा है।
उन्होंने बताया कि सराफा चौपाटी और राजवाड़ा क्षेत्र में किए गए सुधार कार्यों से आपातकालीन सेवाओं की आवाजाही आसान हुई है। स्वच्छता सर्वेक्षण में इस बार देपालपुर के साथ मिलकर काम किया जा रहा है और एक बार फिर देश में पहला स्थान हासिल करने का लक्ष्य रखा गया है।
महापौर ने कहा कि शहर में प्रतिदिन करीब 800 टन गीला कचरा निकल रहा है, जबकि मौजूदा क्षमता 500 टन की है। इसे देखते हुए सीएटी रोड और पितृ पर्वत पर दो नए सीएनजी प्लांट विकसित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही सीवरेज ट्रीटमेंट क्षमता भी बढ़ाई जा रही है।
उन्होंने कहा कि 2011 के मुकाबले शहर की आबादी और मकानों की संख्या लगभग दोगुनी हो चुकी है। इसी को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2047 तक की जलापूर्ति व्यवस्था के लिए 2,600 करोड़ रुपये की परियोजना पर काम शुरू किया गया है। इसमें 1,600 करोड़ रुपये का निवेश नगर निगम करेगा, जबकि 1,000 करोड़ रुपये ब्लू बॉन्ड के माध्यम से जुटाने की तैयारी है। महापौर ने बताया कि ग्रीन बॉन्ड के बाद अब ब्लू बॉन्ड के जरिए भी इंदौर नई मिसाल कायम करेगा।
मास्टर प्लान की 15 से 16 प्रमुख सड़कों पर निर्माण कार्य जारी है और अतिक्रमण हटने के साथ काम में तेजी लाई जा रही है। वहीं सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए शहर में 3,200 से अधिक घरों की छतों पर सोलर प्लांट लगाए जा चुके हैं। महापौर ने कहा कि बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के दौरान नागरिकों को हुई असुविधा के लिए वे उनका आभार व्यक्त करते हैं और विश्वास दिलाते हैं कि इन प्रयासों का लाभ आने वाली पीढ़ियों को मिलेगा।