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धार

5 टन की कार्रवाई या 12-15 टन लकड़ी? वन विभाग की कार्रवाई पर उठे सवाल!  

राजवाड़ा दर्पण
राजवाड़ा दर्पण
5 टन की कार्रवाई या 12-15 टन लकड़ी? वन विभाग की कार्रवाई पर उठे सवाल!

 

प्रेस नोट में विनय टिम्बर मार्ट से लकड़ी लाने का उल्लेख, लेकिन गुटके-फांचरे किस आरा मशीन पर कटे और वास्तविक मात्रा कितनी थी, इस पर विभाग ने नहीं दी जानकारी

     धार। वन मंडल धार द्वारा अवैध लकड़ी परिवहन के खिलाफ की गई कार्रवाई अब सवालों के घेरे में है। विभाग के अनुसार मुखबिर की सूचना पर गठित गश्ती दल ने लेबड़ ब्रिज मार्ग पर ट्राला क्रमांक एमपी09 एचजी 0586 को रोककर तलाशी ली। वाहन में जलाऊ लकड़ी के गुटके-फांचरे भरे मिले। चालक गणेश पिता नाथूलाल,निवासी धार से पूछताछ में लकड़ी बदनावर स्थित विनय टिम्बर मार्ट की आरा मशीन से भरकर इंडोरामा,पीथमपुर स्थित श्री पेपर कंपनी ले जाने की जानकारी सामने आई।

      वन विभाग के मुताबिक चालक के पास लकड़ी के परिवहन से संबंधित अनुज्ञा पत्र या अन्य वैध दस्तावेज नहीं थे। इसके बाद वन अधिनियम 1927 और मप्र अभिवहन वनोपज नियम 2022 के तहत कार्रवाई करते हुए वाहन को मांडव रोड स्थित रेस्ट हाउस लाया गया। विभाग ने लकड़ी की मात्रा करीब 5 टन और बाजार मूल्य लगभग 30 हजार रुपए बताया है। 

     फोटो-वीडियो से अलग तस्वीर का दावा

कार्रवाई के दौरान बनाए गए बताए जा रहे फोटो और वीडियो के आधार पर ट्राला गुटके-फांचरे से पूरी तरह भरा नजर आने का दावा किया जा रहा है। इसी आधार पर कुछ लोगों द्वारा लकड़ी की वास्तविक मात्रा 12 से 15 टन तक होने की चर्चा की जा रही है। बाजार मूल्य भी 50 से 60 हजार रुपए तक होने का अनुमान लगाया जा रहा है। हालांकि इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

     मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि लकड़ी विनय टिम्बर मार्ट से लोड हुई थी, तो गुटके-फांचरे किस आरा मशीन पर काटे गए? विभागीय प्रेस नोट में इसका स्पष्ट उल्लेख नहीं है। इसके अलावा वाहन से बरामद लकड़ी की वास्तविक मात्रा की दोबारा तौल कराई गई या नहीं, यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है।

    अब सवाल उठ रहा है कि विभाग बरामद लकड़ी की मात्रा और उसके स्रोत की पारदर्शी जांच कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करेगा या नहीं। कार्रवाई से संबंधित फोटो-वीडियो एक जिम्मेदार नागरिक के पास सुरक्षित होने की बात कही गई है,जिन्हें आवश्यकता पड़ने पर वरिष्ठ वन अधिकारियों के समक्ष जांच के लिए प्रस्तुत किया जा सकता है।

   धार वन मंडल में सक्रिय हैं लकड़ी तस्कर?

चर्चा है कि पीथमपुर की औद्योगिक इकाइयों तक रोजाना बड़ी संख्या में लकड़ी से भरे वाहन पहुंच रहे हैं। स्थानीय स्तर पर 10 से 15 वाहनों तक के प्रतिदिन आवागमन की चर्चा है। आरोप यह भी हैं कि जानकारी होने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई के बजाय छोटी-छोटी कार्रवाइयों तक मामला सीमित रह जाता है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

   कई रास्तों से इंदौर तक लकड़ी पहुंचने की चर्चा

खरगौन बड़वाह,और गुप्त रास्तों के साथ धामनोद,मनावर, कुक्षी,सरदारपुर, बाग,टांडा, सादलपुर और घाटा बिल्लौद से होते हुए मानपुर, बेटमा,देपालपुर और गौतमपुरा के रास्ते इंदौर तक लकड़ी पहुंचने की चर्चाएं भी सामने आती रही हैं। स्थानीय स्तर पर हरे पेड़ों की कटाई और अवैध परिवहन को लेकर वरिष्ठ अधिकारियों तक शिकायतें पहुंचने की भी चर्चा है। अब देखना है कि वन विभाग इन शिकायतों और मौजूदा कार्रवाई की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाता है या नहीं। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जांच जारी है।

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