धार। वर्ष 2017 के बाद अब करीब नौ साल के लंबे अंतराल के बाद कॉलेज परिसरों में फिर छात्रसंघ चुनाव की उम्मीद जगी है। हाईकोर्ट के सितंबर के पहले सप्ताह में चुनाव कराने के निर्देश के बाद जिले के महाविद्यालयों में छात्र राजनीति को नई रफ्तार मिलने की संभावना है। जिले के करीब 15 शासकीय कॉलेजों में 15 हजार विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। इनमें बड़ी संख्या धार के शासकीय कॉलेज और कन्या महाविद्यालय के विद्यार्थियों की है।
नौ साल में छात्र पीढ़ी बदल चुकी है। मौजूदा अधिकांश विद्यार्थियों ने कॉलेज में छात्रसंघ चुनाव देखा तक नहीं है। ऐसे में चुनाव की चर्चा ने कैंपस में उत्साह बढ़ा दिया है। हालांकि चुनाव प्रत्यक्ष होंगे या किसी अन्य प्रणाली से, इसकी तस्वीर उच्च शिक्षा विभाग की अधिसूचना के बाद साफ होगी।
हाथ से लिखे पोस्टर से सोशल मीडिया तक बदलेगा प्रचार
पहले छात्र नेता हाथ से पोस्टर लिखकर, दीवारों पर नारे लगाकर और कक्षाओं-छात्रावासों में व्यक्तिगत संपर्क कर प्रचार करते थे। बाइक भी दोस्तों से उधार लेने का दौर था। अब सोशल मीडिया प्रचार का बड़ा माध्यम बनने की संभावना है।
फीस से छात्रवृत्ति तक रहेंगे मुद्दे
छात्रसंघ चुनावों में फीस वृद्धि, छात्रवृत्ति, हॉस्टल, परिवहन, परीक्षा और कॉलेज सुविधाएं प्रमुख मुद्दे रहे हैं। छात्रसंघ विद्यार्थियों और प्रशासन के बीच संवाद की महत्वपूर्ण कड़ी भी बन सकता है।
युवा नेतृत्व को मिलेगा मंच
एबीवीपी के छात्र नेता रोहित रघुवंशी ने कहा कि छात्रसंघ चुनाव युवा नेतृत्व तैयार करने की लोकतांत्रिक प्रक्रिया हैं। लंबे अंतराल के बाद चुनाव होना विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण अवसर है।
पूर्व छात्र नेता राजीव यादव ने पुराने चुनावी दौर को याद करते हुए बताया कि उस समय प्रचार सीमित संसाधनों में होता था। व्यक्तिगत संपर्क ही सबसे बड़ा हथियार था।
1985-86: प्रत्यक्ष मतदान प्रणाली
2006-07: नियमित चुनावों का दौर
2016-17: मेरिट आधारित छात्रसंघ व्यवस्था
2017: चुनाव बंद
2026: हाईकोर्ट के निर्देश के बाद फिर उम्मीद सबसे बड़ा बदलाव: हजारों विद्यार्थी पहली बार मतदान करेंगे और कॉलेज कैंपस में लोकतंत्र की नई पाठशाला शुरू होगी।