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नई दिल्ली

900 साल से पत्थर में जीवंत है शिल्पकला: काले पत्थर पर गणेश की अद्भुत नक्काशी,

राजवाड़ा
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900 साल से पत्थर में जीवंत है शिल्पकला: काले पत्थर पर गणेश की अद्भुत नक्काशी,

कुरुवट्टी का मल्लिकार्जुन मंदिर आज भी है आकर्षण

    कल्याणी चालुक्य काल की विरासत में हाथी, गणेश, कार्तिकेय से लेकर राम-लक्ष्मण और वाली-सुग्रीव युद्ध तक की कलाकृतियां; महाशिवरात्रि पर उमड़ते हैं श्रद्धालु

900 साल से पत्थर में जीवंत है शिल्पकला: काले पत्थर पर गणेश की अद्भुत नक्काशी, - 3

   कर्नाटक। दक्षिण भारत की प्राचीन मंदिर स्थापत्य परंपरा का अद्भुत उदाहरण कर्नाटक के विजयनगर जिले के कुरुवट्टी गांव में आज भी मौजूद है। यहां स्थित मल्लिकार्जुन मंदिर करीब नौ सौ साल से अधिक पुराना बताया जाता है। विजयनगर जिला प्रशासन के अनुसार इसका निर्माण लगभग 1087 ईस्वी के आसपास हुआ था। कल्याणी चालुक्य काल में निर्मित यह मंदिर आज भी अपनी बारीक पत्थर नक्काशी और स्थापत्य कला से इतिहासप्रेमियों को आकर्षित करता है।

   काले पत्थर पर ऐसी नक्काशी, जैसे अभी बनाई हो

900 साल से पत्थर में जीवंत है शिल्पकला: काले पत्थर पर गणेश की अद्भुत नक्काशी, - 2

मंदिर की बाहरी दीवारों पर काले पत्थर में उकेरी गई आकृतियां इसकी सबसे बड़ी विशेषता हैं। यहां हाथी, यक्ष, गंधर्व, भैरव, गणेश और कार्तिकेय के साथ राम-लक्ष्मण तथा वाली-सुग्रीव युद्ध के दृश्य भी पत्थरों पर जीवंत दिखाई देते हैं। बेल-बूटों और अन्य अलंकरणों की बारीकी तत्कालीन शिल्पकारों की अद्भुत कला का प्रमाण है।

     गर्भगृह में चिकने काले पत्थर का शिवलिंग स्थापित है। प्रवेश द्वार पर कई स्तरों की नक्काशी है, जिसमें गजलक्ष्मी की आकृति विशेष आकर्षण है। मंडप के तराशे हुए स्तंभ और महिला आकृतियां मंदिर की कलात्मक समृद्धि को और बढ़ाती हैं।

       विशाल नंदी भी खींचता है ध्यान

मंदिर के सामने बने अलग नंदी मंडप में विशाल नंदी की प्रतिमा स्थापित है। आभूषणों और अलंकरणों से सुसज्जित यह प्रतिमा श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। कुरुवट्टी को स्थानीय रूप से बसवन्ना की आराधना से भी जोड़ा जाता है।

       22 शिलालेख बताते हैं पुराना इतिहास

मंदिर की बनावट में गर्भगृह, अंतराल, नवरंग, मुखमंडप और नंदी मंडप शामिल हैं। गर्भगृह के ऊपर वेसर शैली का शिखर और आगे निकला शुकनास इसकी स्थापत्य पहचान है। गांव में मिले 22 शिलालेख भी इसके ऐतिहासिक महत्व को प्रमाणित करते हैं। इनमें मल्लिकार्जुन को अलग-अलग कालखंडों में चोलुक्य मल्लेश्वर, अभिनव सोमेश्वर और अहवमल्लेश्वर जैसे नामों से संबोधित किए जाने के प्रमाण मिलते हैं।

    महाशिवरात्रि पर लगता है रथोत्सव

महाशिवरात्रि के अवसर पर कुरुवट्टी में रथोत्सव आयोजित होता है। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचते हैं। धार्मिक आस्था के साथ यह स्थान दक्षिण भारतीय इतिहास, स्थापत्य और मूर्तिकला को करीब से देखने का अवसर भी देता है।

        ऐसे पहुंच सकते हैं कुरुवट्टी

कुरुवट्टी विजयनगर जिले के हुइना हडगली क्षेत्र में है। यह हुइना हडगली से करीब 39 किलोमीटर दूर है। रेल मार्ग से आने वालों के लिए रणेबेन्नूर रेलवे स्टेशन करीब 31-32 किलोमीटर दूर पड़ता है। हवाई यात्रा के लिए हुबली हवाई अड्डा विकल्प है, जहां से सड़क मार्ग द्वारा मंदिर पहुंचा जा सकता है। हंपी की ऐतिहासिक यात्रा के साथ भी कुरुवट्टी को शामिल किया जा सकता है।

     करीब नौ शताब्दियों से खड़ा यह मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं, बल्कि पत्थरों में दर्ज दक्षिण भारत के इतिहास और शिल्पकला की जीवंत किताब है।

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