लखनऊ। भारतीय प्रशासनिक सेवा की अधिकारी दिव्या मित्तल द्वारा पद से हटने का अनुरोध करने के पश्चात राज्य सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर आवश्यक औपचारिक प्रक्रियाएं प्रारंभ कर दी हैं। नियुक्ति अनुभाग-1 के विशेष सचिव विजय कुमार द्वारा 31 अगस्त को एक आधिकारिक पत्र जारी कर इस संबंध में आगे की कार्रवाई शुरू की गई है। दिए गए निर्देशों के अनुसार, अधिकारी द्वारा प्रस्तुत त्यागपत्र के आवेदन पर अंतिम निर्णय लेने से पूर्व उन समस्त स्थानों से अदेय प्रमाणपत्र (नोड्यूज सर्टिफिकेट) प्राप्त करना अनिवार्य है, जहां वे अपने सेवाकाल के दौरान कार्यरत रही हैं।
वर्ष 2013 बैच की प्रशासनिक अधिकारी दिव्या मित्तल ने सबसे पहले मेरठ में संयुक्त मजिस्ट्रेट के रूप में कार्यभार संभाला था। इसके बाद वे गौतमबुद्ध नगर में मुख्य विकास अधिकारी तथा कानपुर नगर में यूपीसीडी की संयुक्त प्रबंध निदेशक के पद पर तैनात रहीं। वे बरेली विकास प्राधिकरण में उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी भी संभाल चुकी हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने संतकबीर नगर, मीरजापुर और बस्ती जनपदों में बतौर जिलाधिकारी प्रशासनिक नेतृत्व प्रदान किया, तथा उत्तर प्रदेश ग्रामीण सड़क विकास एजेंसी में मुख्य कार्यपालक अधिकारी के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं।
जुलाई 2024 से 5 मई 2026 तक देवरिया जिले में जिलाधिकारी के रूप में तैनात रहने के पश्चात 6 मई 2026 को उनका स्थानांतरण शासन में कर दिया गया था, जहां वे वर्तमान में राजस्व विभाग में विशेष सचिव का पद संभाल रही थीं। अब त्यागपत्र की कार्रवाई को नियमानुसार आगे बढ़ाने के लिए प्रमुख सचिव (राजस्व विभाग), मुख्य कार्यपालक अधिकारी (उत्तर प्रदेश ग्रामीण सड़क विकास एजेंसी) और उपाध्यक्ष (बरेली विकास प्राधिकरण) सहित उन सभी संबंधित जिलास्तरीय कार्यालयों को पत्र प्रेषित कर दिया गया है। संबंधित विभागों एवं जिलों से बकाया रहित प्रमाणपत्र प्राप्त होने के उपरांत ही शासन स्तर से इस प्रकरण में अंतिम निर्णय लिया जाएगा।