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धार

आजादी के बाद पहली बार टांडा में गूंजी ट्रेन की सीटी, पटरी पर दौड़ी उम्मीद  

राजवाड़ा दर्पण
राजवाड़ा दर्पण
आजादी के बाद पहली बार टांडा में गूंजी ट्रेन की सीटी, पटरी पर दौड़ी उम्मीद

 

धार। आजादी के बाद जिस पल का इंतजार टांडा और आसपास के आदिवासी अंचल के लोग दशकों से कर रहे थे, वह मंगलवार को साकार हो गया। टांडा रोड रेलवे स्टेशन पर पहली बार 12 कोच की मेमू ट्रेन पहुंची तो स्टेशन पर लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। ट्रेन को निहारती आंखों में वर्षों का इंतजार और विकास की नई उम्मीद साफ दिखाई दी।

प्रतापनगर से सुबह करीब 5 बजे रवाना हुई मेमू ट्रेन करीब 9.35 बजे टांडा रोड पहुंची। छोटा उदयपुर-धार रेल परियोजना के तहत डेकाकुंड से टांडा रोड तक बने नए 16 किमी रेलखंड पर यह महत्वपूर्ण ट्रायल रहा। रेल संरक्षा आयुक्त की मंजूरी के बाद अब 8 सितंबर से नियमित यात्री सेवा शुरू होने जा रही है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 8 सितंबर को गुजरात से वर्चुअल माध्यम से टांडा रोड-आलीराजपुर रेल सेवा का लोकार्पण करेंगे। टांडा रोड स्टेशन पर केंद्रीय राज्यमंत्री सावित्री ठाकुर मौजूद रहेंगी।

   435 करोड़ से बना 16 किमी ट्रैक

छोटा उदयपुर-धार रेल परियोजना की कुल लागत करीब 3900 करोड़ रुपए है। 147 किमी लंबी परियोजना में 101 किमी रेलखंड तैयार हो चुका है। डेकाकुंड से टांडा रोड तक 16 किमी ट्रैक पर करीब 435 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। टांडा से तिरला-धार तक करीब 46 किमी काम शेष है।

   गुजरात से सीधा जुड़ाव, रोजगार की उम्मीद

रेल सेवा शुरू होने से टांडा और आसपास के आदिवासी क्षेत्रों को गुजरात से सीधा रेल संपर्क मिलेगा। शिक्षा, रोजगार, व्यापार और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए आवागमन आसान होगा। किसानों और व्यापारियों को बड़े बाजारों तक पहुंच मिलेगी। रेल की यह सीटी सिर्फ कनेक्टिविटी नहीं, बल्कि आदिवासी अंचल में विकास के नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है।

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