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इंदौर

आंखों में आंसू, सीने से लगाया तिरंगा: इंदौर ने नम आंखों से मेजर हमजा आरिफ को दी अंतिम विदाई  

राजवाड़ा दर्पण
राजवाड़ा दर्पण
आंखों में आंसू, सीने से लगाया तिरंगा: इंदौर ने नम आंखों से मेजर हमजा आरिफ को दी अंतिम विदाई

 

पत्नी ज्योति अरोरा अंतिम श्रद्धांजलि देते हुए फूट-फूटकर रोईं, सेना ने गार्ड ऑफ ऑनर के बाद सौंपा तिरंगा; पूरे सैन्य सम्मान के साथ हुआ सुपुर्द-ए-खाक

      इंदौर। जैसलमेर में सड़क हादसे में शहीद हुए भारतीय सेना के अधिकारी मेजर हमजा आरिफ को रविवार को इंदौर ने नम आंखों से अंतिम विदाई दी। पूरे सैन्य सम्मान के साथ निकली अंतिम यात्रा में हर कदम पर देशभक्ति और शोक का संगम दिखाई दिया। लेकिन विदाई के दौरान दो ऐसे भावुक पल आए, जिन्होंने वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम कर दीं।

   पहला पल तब आया, जब मेजर हमजा आरिफ की पत्नी ज्योति अरोरा कांपते हाथों से अपने पति को अंतिम श्रद्धांजलि देने पहुंचीं। पति को आखिरी बार विदा करते हुए वह खुद को संभाल नहीं सकीं और फूट-फूटकर रो पड़ीं। उस कठिन घड़ी में उनकी मां ने उन्हें गले लगाकर सहारा दिया। वहां मौजूद लोग भी इस दृश्य को देखकर भावुक हो उठे।

    दूसरा मार्मिक क्षण गार्ड ऑफ ऑनर के बाद सामने आया। सेना के जवानों ने राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा उनकी पत्नी को सौंपा, जिसमें लिपटकर मेजर हमजा आरिफ का पार्थिव शरीर इंदौर पहुंचा था। पत्नी ने तिरंगे को सीने से लगाया तो हर आंख नम हो गई। उनके चेहरे पर पति को खोने का गहरा दर्द था, लेकिन उसी तिरंगे के प्रति गर्व भी साफ झलक रहा था।

    मेजर हमजा आरिफ का पार्थिव शरीर अंतिम यात्रा के साथ इमली बाजार स्थित शिया दाऊदी बोहरा कब्रिस्तान पहुंचा, जहां सैन्य सम्मान और धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया गया। सेना के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर अपने साथी अधिकारी को अंतिम सलामी दी।

    अंतिम यात्रा में राजस्थान और मध्य प्रदेश से सेना के वरिष्ठ अधिकारी, कर्नल, लेफ्टिनेंट और मेजर रैंक के अधिकारी, बोहरा समाज के लोग, शहरवासी और बड़ी संख्या में परिजन शामिल हुए। सभी ने अपने वीर सपूत को अंतिम नमन किया।

   मेजर हमजा आरिफ को जानने वाले बताते हैं कि वे बेहद सरल, अनुशासित और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी थे। उनकी असमय मृत्यु से परिवार ही नहीं, पूरा शहर शोक में डूबा है। देशसेवा के प्रति उनका समर्पण, उनका अनुशासन और राष्ट्र के प्रति उनका जज्बा हमेशा लोगों की स्मृतियों में जीवित रहेगा। इंदौर ने अपने इस वीर बेटे को अश्रुपूरित आंखों और गर्व से भरे दिल के साथ अंतिम विदाई दी।

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