नई दिल्ली। नाबालिग से यौन उत्पीड़न के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे आसाराम को फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है। गुरुवार को शीर्ष अदालत ने स्वास्थ्य आधार पर दायर उनकी अंतरिम जमानत की मांग स्वीकार करने से इनकार कर दिया। हालांकि, अदालत ने उन्हें जेल में चौबीसों घंटे देखभाल के लिए अपनी पसंद का एक अनुभवी केयरटेकर रखने की अनुमति दे दी।
जस्टिस एम. एम. सुंदरेश और पी. बी. वराले की पीठ ने अंतरिम जमानत की याचिका पर अंतिम फैसला फिलहाल सुरक्षित रखते हुए उसे लंबित रखा है। अदालत ने यह भी कहा कि यदि भविष्य में आसाराम की स्वास्थ्य स्थिति गंभीर होती है, तो वे मामले का तत्काल उल्लेख कर सुनवाई का अनुरोध कर सकते हैं।
सुनवाई के दौरान राजस्थान सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि आसाराम ने यह तथ्य छिपाया कि उनके वकील की ओर से पहले ही पैरोल के लिए आवेदन किया जा चुका है। इस पर आसाराम की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि पैरोल आवेदन काफी पहले दायर किया गया था और उसका आधार चिकित्सीय कारण नहीं था।
गौरतलब है कि आसाराम 2013 में दर्ज नाबालिग से यौन उत्पीड़न के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने जमानत पर कोई राहत नहीं दी है, लेकिन उनकी स्वास्थ्य संबंधी स्थिति पर आगे भी सुनवाई का रास्ता खुला रखा है।