1,000 आंगनबाड़ियों को आधुनिक स्वरूप देने पर 60 करोड़ खर्च, हर केंद्र पर होंगे 6 लाख रुपए; बच्चों की शुरुआती शिक्षा पर सरकार का फोकस
भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार अब आंगनबाड़ियों को केवल पोषण और टीकाकरण केंद्र तक सीमित नहीं रखेगी। इन्हें बच्चों की पहली स्मार्ट पाठशाला के रूप में विकसित किया जाएगा। इसकी शुरुआत उज्जैन से 'हैप्पी आंगन ऑफ सिंहस्थ' अभियान के तहत हो रही है, जिसे प्रारंभिक शिक्षा में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
आईआईएम बैंगलोर, महिला एवं बाल विकास विभाग और नोवल सोशल फाउंडेशन के सहयोग से चलाए जा रहे इस अभियान के तहत उज्जैन जिले की करीब 1,000 आंगनबाड़ियों को आधुनिक प्री-स्कूल के रूप में विकसित किया जाएगा। इस परियोजना पर लगभग 60 करोड़ रुपए खर्च होंगे और प्रत्येक आंगनबाड़ी के उन्नयन पर करीब 6 लाख रुपए की लागत आएगी।
अभियान के तहत बच्चों के लिए खेल-आधारित शिक्षण, आकर्षक कक्षाएं और आधुनिक शिक्षण संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि शुरुआती शिक्षा अधिक प्रभावी और रुचिकर बन सके।
उज्जैन के सदावल गांव में पहली मॉडल स्मार्ट एवं हैप्पी आंगनबाड़ी तैयार हो चुकी है, जिसका हाल ही में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने लोकार्पण किया। सरकार का मानना है कि यह मॉडल भविष्य में प्रदेश की अन्य आंगनबाड़ियों के लिए भी मार्गदर्शक बनेगा और बच्चों को शुरुआती स्तर से ही बेहतर शिक्षण वातावरण उपलब्ध होगा।