700 करोड़ से शुरू हुई इंदौर-दाहोद रेल परियोजना की लागत पहुंची 9 हजार करोड़ रुपए के करीब, टनल, पर्यावरणीय मंजूरी और अधूरे पुल बने सबसे बड़ी चुनौती
धार। धार जिले सहित मालवा और आदिवासी अंचल के लाखों लोगों का चार दशक पुराना रेल का सपना अब भी अधूरा है। रेलवे की ओर से इस वर्ष अक्टूबर तक धार तक ट्रेन संचालन शुरू करने का दावा किया जा रहा है, लेकिन जमीनी स्थिति इस लक्ष्य पर सवाल खड़े कर रही है। परियोजना की सबसे महत्वपूर्ण टीही-धार सुरंग का निर्माण अब भी अधूरा है और इसके दिसंबर 2026 से पहले पूरा होने की संभावना कम नजर आ रही है। दूसरी ओर खरमोर अभयारण्य में पर्यावरणीय मंजूरी, कई स्थानों पर अधूरे पुल और लंबित भूमि अधिग्रहण के कारण इंदौर-दाहोद रेल परियोजना की रफ्तार धीमी बनी हुई है। कभी 700 करोड़ रुपए की लागत से शुरू हुई यह परियोजना अब बढ़कर करीब 9 हजार करोड़ रुपए तक पहुंच चुकी है।
इंदौर-दाहोद नई रेल लाइन परियोजना की घोषणा वर्ष 1986 में हुई थी। वर्ष 2007-08 के रेल बजट में इसे मंजूरी मिली और 2008 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने झाबुआ में इसका शिलान्यास किया। इसके बाद लोगों को उम्मीद थी कि कुछ वर्षों में रेल सुविधा मिल जाएगी, लेकिन करीब दो दशक बाद भी पूरी लाइन तैयार नहीं हो सकी है। लगातार बढ़ती लागत और निर्माण में हो रही देरी इस महत्वाकांक्षी परियोजना की सबसे बड़ी चुनौती बन गई है।
वर्तमान में इंदौर से राऊ और आगे टीही तक रेल लाइन तैयार है, वहीं पीथमपुर से धार तक ट्रायल भी किया जा चुका है। हालांकि टीही और धार के बीच बन रही सुरंग अधूरी होने से दोनों हिस्सों का रेल संपर्क अब तक नहीं जुड़ पाया है। यही सुरंग पूरी परियोजना की सबसे अहम कड़ी मानी जा रही है। इसके पूरा होने के बाद ही धार तक नियमित ट्रेन संचालन का रास्ता साफ होगा।
परियोजना से धार, झाबुआ और आसपास के आदिवासी क्षेत्रों को व्यापार, पर्यटन, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के नए अवसर मिलने की उम्मीद है। लेकिन हर साल बढ़ती समयसीमा से लोगों की बेचैनी भी बढ़ रही है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अक्टूबर में ट्रेन वास्तव में धार पहुंचेगी या यह लक्ष्य भी एक बार फिर आगे बढ़ जाएगा।
रेलवे ने परियोजना के शेष हिस्सों के लिए अलग-अलग समय-सीमा तय की है। धार-तिरला खंड को दिसंबर 2026, तिरला-अमझेरा को फरवरी 2027, सरदारपुर-उमरकोट को मार्च 2028 और उमरकोट-फतेहपुर खंड को मार्च 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि निर्माण की मौजूदा गति को देखते हुए इन समय-सीमाओं को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

परियोजना एक नजर में
कुल लंबाई : 204.76 किलोमीटर
तैयार रेलखंड : इंदौर-टीही (21 किमी) और दाहोद-कठवाड़ा (11.30 किमी)
प्रमुख बाधाएं : टीही-धार सुरंग, खरमोर अभयारण्य की पर्यावरणीय मंजूरी, भूमि अधिग्रहण और पुल निर्माण
अनुमानित लागत : 700 करोड़ रुपए से बढ़कर करीब 9 हजार करोड़ रुपए