बिना कानूनी राहत के सीधे डिटेंशन सेंटर भेजे जा रहे, 16,500 करोड़ से बने नए ठिकाने
नई दिल्ली। अमेरिका में बिना वैध दस्तावेजों के रह रहे 18,000 भारतीय नागरिकों पर डिपोर्टेशन (देशनिकाला) की तलवार लटक रही है। ट्रम्प प्रशासन अपनी कड़क इमिग्रेशन नीति के तहत इस बार भी प्रवासियों को वापस भेजने के लिए सैन्य विमानों का सहारा लेने की तैयारी में है।
इस कड़ी कार्रवाई की सबसे बड़ी बात यह है कि पकड़े गए अनडॉक्युमेंटेड प्रवासियों को न तो अपील करने का अधिकार मिल रहा है, न दलील का और न ही वकील की मदद लेने का मौका दिया जा रहा है। अमेरिकी जांच एजेंसी आईसीई (इमिग्रेशन कस्टम्स एंड एनफोर्समेंट) की टीमें लगातार अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं।
न्यूयॉर्क, टेक्सास, कैलिफोर्निया और न्यूजर्सी जैसे बड़े अमेरिकी शहरों से मिली जमीनी जानकारी के मुताबिक, इस अभियान ने बिना कागजात वाले भारतीयों की जिंदगी में भारी उथल-पुथल मचा दी है। डिटेंशन सेंटरों (हिरासत केंद्रों) में बंद किए गए लोगों के साथ दुर्व्यवहार और बदसलूकी की कई दर्दनाक कहानियां भी सामने आ रही हैं।
कैदियों की तरह रखने के लिए बने दो विशाल डिटेंशन सेंटर
प्रवासियों को देश से बाहर निकालने से पहले रखने के लिए ट्रम्प प्रशासन ने बड़े पैमाने पर इंतजाम किए हैं। सरकार ने एल पासो में एक और कैलिफोर्निया में दो बड़े वेयरहाउस खरीदे हैं, जिन पर करीब 16,500 करोड़ रुपए की भारी-भरकम राशि खर्च की गई है। इन विशाल गोदामों को डिटेंशन सेंटर में तब्दील करके आईसीई के हवाले कर दिया गया है। मौजूदा वक्त में इन सेंटरों के भीतर लगभग 12,000 प्रवासियों को कैद करके रखा जा रहा है।
कानूनी जानकारों का दावा: छीना जा रहा सुनवाई का हक
न्यूयॉर्क के जाने-माने इमिग्रेशन अटॉर्नी ग्रेग सिस्किंड ने इस पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पिछले 30 वर्षों से प्रवासियों के कानूनी मामले देख रहे सिस्किंड का कहना है कि पहले नियमों के मुताबिक बिना दस्तावेज वाले किसी भी शख्स को अदालत में अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलता था। मगर अब हालात बदल चुके हैं और आईसीई के छापों में पकड़े जा रहे लोगों को बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के सीधे इन केंद्रों में ठूंसा जा रहा है। उन्होंने बताया कि अमेरिका की संघीय व्यवस्था में राज्यों के पास मानवाधिकारों से जुड़े अपने कानून हैं, लेकिन केंद्रीय एजेंसी आईसीई इन स्थानीय नियमों को दरकिनार कर हर राज्य में मनमर्जी से धरपकड़ कर रही है।
पिछले सालों के आंकड़े और बेड़ियों में जकड़े भारतीयों की कड़वी हकीकत
भारत के विदेश मंत्रालय द्वारा जून 2026 में जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, साल 2025 में अमेरिका ने 3,567 भारतीय नागरिकों को जबरन वापस भारत भेजा था। वहीं, साल 2026 के शुरुआती छह महीनों (जून तक) में ही 1,076 भारतीयों को डिपोर्ट किया जा चुका है। इस पूरे विवाद की शुरुआत 5 फरवरी 2025 को हुई थी, जब अमेरिकी इतिहास में पहली बार एक सैन्य विमान के जरिए 104 भारतीयों को वापस अमृतसर भेजा गया था। उस दौरान भारत डिपोर्ट किए गए कई लोगों के हाथों में हथकड़ियां और पैरों में लोहे की बेड़ियां बंधी हुई थीं। विमान में चढ़ते वक्त पैरों में चेन बंधी होने वाले वीडियो के स्क्रीनशॉट जब सोशल मीडिया पर वायरल हुए, तो भारत में इस पर भारी आक्रोश देखने को मिला। इस अमानवीय बर्ताव को लेकर भारत की संसद में भी विपक्षी दलों ने जमकर हंगामा किया था।