सरकार का नया एक्शन प्लान तैयार, कॉलोनी सेल बनाएगा एसओपी; वर्षों से वैधीकरण के दावों के बावजूद अधिकांश कॉलोनियां अब भी नियमों के दायरे से बाहर
भोपाल। प्रदेश में वर्षों से अवैध कॉलोनियों को वैध करने के दावों के बीच अब सरकार ने सख्ती का रास्ता अपनाने की तैयारी कर ली है। शासन और प्रशासन एक बार फिर प्रदेशभर की अवैध कॉलोनियों का नया सर्वे कराकर सूची तैयार करेगा। इसके बाद नियमों का उल्लंघन करने वाले कॉलोनाइजरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया के लिए कॉलोनी सेल अलग से मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करेगा।
जानकारी के अनुसार, नगर निगम और प्रशासन के पास जनसुनवाई में सबसे अधिक शिकायतें अवैध कॉलोनियों और संस्थाओं की जमीनों पर किए गए अवैध प्लॉटिंग को लेकर पहुंच रही हैं। ऐसे मामलों में लंबे समय से प्रभावी कार्रवाई नहीं होने के कारण अवैध कॉलोनियों का दायरा लगातार बढ़ता गया। अब सरकार इसे नियंत्रित करने के लिए कड़े कानूनी प्रावधान लागू करने की तैयारी में है।
दरअसल, पिछले दो दशकों में विधानसभा चुनावों से पहले अवैध कॉलोनियों को वैध करने की घोषणाएं कई बार की गईं, लेकिन प्रक्रिया की जटिलता, दस्तावेजों की कमी और विकास शुल्क जमा नहीं होने के कारण अधिकांश कॉलोनियां आज भी वैध नहीं हो सकीं। नगर निगम द्वारा जिन कॉलोनियों को वैध घोषित किया गया, उनमें भी बड़ी संख्या में विकास शुल्क की राशि अब तक जमा नहीं हो सकी है। इससे मूलभूत सुविधाओं के विकास और रखरखाव पर भी असर पड़ा है।
शहरी विकास विशेषज्ञों का मानना है कि बिना स्वीकृति विकसित हो रही कॉलोनियों से सड़क, नाली, पेयजल, सीवरेज और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। वहीं, प्लॉट खरीदने वाले आम नागरिकों को भी बाद में वैधता, नामांतरण और निर्माण अनुमति जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
प्रशासन का कहना है कि इस बार केवल वैधीकरण की घोषणा नहीं, बल्कि अवैध प्लॉटिंग करने वालों की जवाबदेही भी तय की जाएगी। नई सूची तैयार होने के बाद संबंधित कॉलोनाइजरों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी। सरकार का उद्देश्य अनियोजित शहरी विस्तार पर रोक लगाना और भविष्य में अवैध कॉलोनियों के निर्माण को पूरी तरह नियंत्रित करना है।