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धार

भोजशाला भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक: राजाभोज स्मृति व्याख्यानमाला में इतिहास, विरासत और राष्ट्रीय दायित्व पर मंथन  

राजवाड़ा दर्पण
राजवाड़ा दर्पण
भोजशाला भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक: राजाभोज स्मृति व्याख्यानमाला में इतिहास, विरासत और राष्ट्रीय दायित्व पर मंथन

 

धार में चार घंटे तक चला वैचारिक आयोजन, दो हजार से अधिक श्रोताओं ने सुने इतिहासकारों और चिंतकों के विचार

धार। राजाभोज स्मृति व्याख्यानमाला आयोजन समिति की ओर से शुक्रवार को मिलन महल में "भोजशाला : भारत का सांस्कृतिक पुनर्जागरण – दिशा,दृष्टि एवं दायित्व"विषय पर विशेष व्याख्यानमाला आयोजित की गई। करीब चार घंटे तक चले इस कार्यक्रम में दो हजार से अधिक लोगों ने भाग लिया। इतिहास, संस्कृति,भारतीय ज्ञान परंपरा और राष्ट्रीय दायित्व जैसे विषयों पर देश के प्रख्यात वक्ताओं ने अपने विचार रखे। कार्यक्रम में श्रोताओं ने पूरे समय अनुशासन के साथ उपस्थित रहकर वक्ताओं को सुना।

अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के राष्ट्रीय संगठन सचिव एवं इतिहासकार डॉ. बालमुकुंद पाण्डेय ने कहा कि भारतीय इतिहास को भारतीय दृष्टि से पढ़ने और समझने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि राजा भोज,धारा नगरी और भारतीय ज्ञान परंपरा जैसे गौरवशाली अध्यायों को लंबे समय तक उचित स्थान नहीं मिला। उनका कहना था कि इतिहास केवल सत्ता परिवर्तन का विवरण नहीं, बल्कि राष्ट्र की सांस्कृतिक चेतना और ज्ञान परंपरा का दस्तावेज है। नई पीढ़ी को प्रमाणिक स्रोतों के आधार पर भारत के गौरवशाली अतीत से परिचित कराया जाना चाहिए।

प्रख्यात चिंतक प्रशांत पोल ने कहा कि राजा भोज द्वारा स्थापित भोजशाला संस्कृत,गणित, खगोल,वास्तु और विज्ञान का महत्वपूर्ण अध्ययन केंद्र थी। उन्होंने बताया कि राजा भोज का ग्रंथ 'समरांगण सूत्रधार' प्राचीन भारतीय विज्ञान और यांत्रिकी का अद्भुत दस्तावेज है, जिसमें स्वचालित तकनीकों और जल-शक्ति के उपयोग जैसे विषयों का उल्लेख मिलता है। पत्रकार प्रफुल्ल केतकर ने कहा कि भोजशाला केवल एक इमारत नहीं, बल्कि भारत की ज्ञान,संस्कृति और शिक्षा की समृद्ध परंपरा का प्रतीक है। उन्होंने इतिहास को भारतीय दृष्टिकोण और उपलब्ध पुरातात्विक साक्ष्यों के आधार पर समझने की आवश्यकता बताते हुए कहा कि भोजशाला का संघर्ष सांस्कृतिक चेतना और ऐतिहासिक अस्मिता के पुनर्जागरण से जुड़ा हुआ है।

व्याख्यानमाला के अध्यक्ष डॉ.दिनेश कर्मा और सचिव अधिवक्ता सिद्धार्थ जैन ने बताया कि दत्ता जी उननगाउकर स्मृति न्यास वर्ष 2015 से इस व्याख्यानमाला का आयोजन कर रहा है। न्यास सेवा, संस्कार और वैचारिक जागरण के क्षेत्र में लगातार कार्य कर रहा है तथा हर वर्ष देश के प्रतिष्ठित विद्वानों को आमंत्रित कर समसामयिक विषयों पर संवाद आयोजित करता है।

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