सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद प्रशासन ने भोजशाला से एक किलोमीटर दूर वैकल्पिक स्थान किया चिन्हित, मुस्लिम पक्ष ने जताई आपत्ति; अब 5 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
धार। सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद शुक्रवार को धार की ऐतिहासिक भोजशाला में दिनभर घटनाक्रम तेजी से बदलता रहा। सुबह हिंदू समाज ने नियमित रूप से पूजा-अर्चना की, जबकि जुमे की नमाज के लिए जिला प्रशासन ने भोजशाला परिसर से करीब एक किलोमीटर दूर ग्राम मालीवाड़ा स्थित सर्वे क्रमांक 664 की जमीन चिन्हित की। हालांकि मुस्लिम समुदाय ने इस स्थान पर सहमति नहीं जताई, जिसके चलते वहां नमाज अदा नहीं की गई। पूरे दिन प्रशासन और मुस्लिम पक्ष के बीच चर्चा का दौर चलता रहा। वहीं भोजशाला परिसर और आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश मिलने के बाद जिला प्रशासन ने वैकल्पिक स्थान की तलाश तेज कर दी थी। प्रशासन ने चालीस पीर दरगाह के सामने स्थित जमीन को नमाज के लिए उपयुक्त मानते हुए वहां साफ-सफाई और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं भी शुरू कर दीं। इसके बावजूद मुस्लिम समुदाय ने इसे भोजशाला से अधिक दूरी पर होने का हवाला देते हुए स्वीकार नहीं किया।
इधर, भोजशाला उत्सव समिति ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का स्वागत करते हुए इसे न्यायिक प्रक्रिया के अनुरूप बताया। प्रशासन पूरे दिन दोनों पक्षों के बीच संवाद बनाए रखने और कानून-व्यवस्था कायम रखने में जुटा रहा।
धार कलेक्टर राजीव रंजन मीणा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश प्राप्त होने के बाद उसका विस्तृत अध्ययन किया गया है। न्यायालय के निर्देशों का पूर्ण पालन सुनिश्चित किया जाएगा और जिले में शांति एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
क्या है पूरा मामला
भोजशाला में धार्मिक अधिकारों को लेकर लंबे समय से न्यायालय में विवाद चल रहा है। इंदौर हाईकोर्ट ने वैज्ञानिक सर्वेक्षण के आधार पर भोजशाला को मंदिर मानते हुए शुक्रवार की जुमे की नमाज पर रोक लगाई थी। इसके खिलाफ मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। शीर्ष अदालत ने अंतरिम राहत देते हुए राज्य सरकार को शुक्रवार दोपहर 1 से 3 बजे के बीच मुस्लिम समुदाय के लिए संरक्षित परिसर से अलग वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराने के निर्देश दिए, लेकिन भोजशाला परिसर में नमाज की अनुमति नहीं दी। साथ ही नियमित पूजा जारी रखने, मूल संरचना में बिना न्यायालय की अनुमति बदलाव नहीं करने और मामले की अगली सुनवाई 5 अगस्त 2026 को तय की है।