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भोजशाला पहुंचीं साध्वी ऋतंभरा: बोलीं- 'भोजशाला का सत्य जीत चुका, अब काशी-मथुरा में भी सत्य की होगी विजय'  

राजवाड़ा दर्पण ब्यूरो
राजवाड़ा दर्पण ब्यूरो
भोजशाला पहुंचीं साध्वी ऋतंभरा: बोलीं- 'भोजशाला का सत्य जीत चुका, अब काशी-मथुरा में भी सत्य की होगी विजय'

 

मां वाग्देवी के किए दर्शन-पूजन, राजा भोज के वैभव की वापसी का जताया विश्वास; जंतर-मंतर प्रदर्शन पर भी की टिप्पणी

     धार। ऐतिहासिक भोजशाला में गुरुवार को साध्वी ऋतंभरा के आगमन पर धार्मिक माहौल देखने को मिला। वैदिक मंत्रोच्चार और 'जय श्रीराम' तथा 'मां वाग्देवी' के जयघोष के बीच उन्होंने मां वाग्देवी के दर्शन-पूजन कर देश और समाज की सुख-समृद्धि की कामना की। इस दौरान केंद्रीय राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर, बड़ी संख्या में श्रद्धालु और समर्थक भी मौजूद रहे। सुरक्षा व्यवस्था के बीच साध्वी ऋतंभरा के दर्शन के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।

        दर्शन-पूजन के बाद साध्वी ऋतंभरा ने कहा कि "भोजशाला का सत्य अग्नि परीक्षा से गुजरकर और अधिक मजबूत होकर सामने आया है। जैसे प्रह्लाद अग्नि में भी सुरक्षित रहे, उसी तरह सत्य कभी पराजित नहीं होता।" उन्होंने कहा कि यह भूमि राजा भोज की विरासत, ज्ञान, विज्ञान, संगीत और संस्कृति की पहचान रही है और आने वाले समय में फिर से उसी वैभव की वापसी होगी।

        उन्होंने कहा कि वैभव केवल भव्य इमारतों से नहीं, बल्कि ज्ञान, संस्कार और संस्कृति से आता है। भारतीय संतानों को संस्कारों से सींचने की आवश्यकता है, ताकि देश की सांस्कृतिक विरासत और मजबूत हो सके। उन्होंने विश्वास जताया कि मां वाग्देवी की प्रतिमा भी शीघ्र अपने मूल स्थान पर वापस आएगी।

       साध्वी ऋतंभरा ने कहा कि भोजशाला का संघर्ष केवल एक धार्मिक स्थल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लंबे समय से चले आ रहे सांस्कृतिक संघर्ष का प्रतीक है। उन्होंने दावा किया कि "भोजशाला के बाद काशी और मथुरा में भी सत्य की विजय होगी।"

     दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी आंदोलन में अभद्र और अश्लील भाषा का प्रयोग उचित नहीं है। उनके अनुसार अधिकारों की लड़ाई मर्यादा और संस्कृति के दायरे में रहकर लड़ी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि अशोभनीय भाषा आंदोलन की गरिमा को कम करती है और ऐसे मामलों में उचित कार्रवाई होनी चाहिए।

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