ओपीडी-इमरजेंसी में ड्यूटी के बाद आधे घंटे जताया विरोध; बोले- ₹14,337 स्टाइपेंड, देश में सबसे कम
इंदौर। भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज में अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे इंटर्न डॉक्टरों पर पुलिस कार्रवाई के बाद मंगलवार को इंदौर में भी आक्रोश नजर आया। लाठीचार्ज, वॉटर कैनन और आंसू गैस के इस्तेमाल के विरोध में इंटर्न डॉक्टरों ने अस्पताल परिसर में करीब आधे घंटे प्रदर्शन कर अपना विरोध दर्ज कराया। हालांकि मरीजों की परेशानी को देखते हुए डॉक्टरों ने विरोध को सीमित रखा। सुबह से उन्होंने ओपीडी, इमरजेंसी और अस्पताल की अन्य सेवाओं में नियमित ड्यूटी भी निभाई।
इंटर्न डॉक्टर रिंकू वर्मा ने बताया कि उनकी मुख्य मांग स्टाइपेंड बढ़ाने की है। वर्तमान में उन्हें ₹14,337 प्रतिमाह स्टाइपेंड मिल रहा है। डॉक्टरों का दावा है कि यह देश में मिलने वाले सबसे कम स्टाइपेंड में शामिल है। उनका कहना है कि कई राज्यों में मेडिकल शिक्षा की फीस कम होने के बावजूद वहां इंटर्न डॉक्टरों को इससे ज्यादा राशि दी जा रही है।

‘शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर अपराधियों जैसा व्यवहार’
डॉक्टरों का सबसे ज्यादा आक्रोश भोपाल की कार्रवाई को लेकर है। उनका आरोप है कि गांधी मेडिकल कॉलेज में शांतिपूर्ण तरीके से मांग उठा रहे इंटर्न डॉक्टरों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया। वॉटर कैनन और आंसू गैस का भी इस्तेमाल किया गया। डॉक्टरों ने दावा किया कि कार्रवाई में कई इंटर्न घायल हुए हैं। कुछ को कान में चोट और कुछ को फ्रैक्चर जैसी गंभीर चोटें आने की बात कही गई है।
ड्यूटी भी निभाई, विरोध भी जताया
इंदौर के इंटर्न डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन मरीजों के खिलाफ नहीं है। प्रदर्शन से पहले और बाद में उन्होंने अस्पताल की सेवाएं जारी रखीं। डॉक्टरों का कहना है कि पीजी डॉक्टरों के साथ वे भी अस्पताल की व्यवस्था और मरीजों की देखभाल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इंटर्न डॉक्टरों ने सरकार से स्टाइपेंड में सम्मानजनक बढ़ोतरी और भोपाल में हुई कार्रवाई की निष्पक्ष समीक्षा की मांग की है। उनका कहना है कि वे अपनी जिम्मेदारियों के अनुरूप अधिकार मांग रहे हैं, किसी व्यवस्था को बाधित करना उनका उद्देश्य नहीं है।