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इंदौर

बांक पंचायत में बेटे की गाड़ी अटैच कर सरकारी खजाने से कराया भुगतान, सचिव-सरपंच समेत तीन पर लोकायुक्त केस  

राजवाड़ा दर्पण
राजवाड़ा दर्पण
बांक पंचायत में बेटे की गाड़ी अटैच कर सरकारी खजाने से कराया भुगतान, सचिव-सरपंच समेत तीन पर लोकायुक्त केस

 

बिना टेंडर और ग्रामसभा की अनुमति के वाहन लगाने का आरोप; जांच में पद के दुरुपयोग और बेटे को अनुचित आर्थिक लाभ पहुंचाने की पुष्टि

    इंदौर। ग्राम पंचायत बांक में निजी वाहन को नियम विरुद्ध तरीके से पंचायत के काम में लगाने और सरकारी निधि से उसका भुगतान कराने के मामले में लोकायुक्त पुलिस ने तत्कालीन सचिव, तत्कालीन सरपंच और सचिव के बेटे के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। कार्रवाई 18 अगस्त को की गई। आरोप है कि सचिव ने अपने बेटे के वाहन को पंचायत में अटैच कराया और बाद में पंचायत निधि से उसका किराया भी भुगतान कराया।

    लोकायुक्त पुलिस के अनुसार तत्कालीन पंचायत सचिव प्रहलाद नील ने अपने पुत्र धीरज नील के नाम दर्ज वाहन क्रमांक एमपी 10 जी 1435 को ग्राम पंचायत बांक में सफाई सहित अन्य कार्यों के लिए लगाया था। इसके बाद तत्कालीन सरपंच लक्ष्मीबाई पति राधेश्याम चौहान और सचिव ने अपने हस्ताक्षर से भुगतान संबंधी ठहराव प्रस्ताव तैयार किया। इसी आधार पर पंचायत निधि से वाहन का किराया जारी किया गया।

    शिकायत की जांच उप पुलिस अधीक्षक सुनील तालान ने की। जांच में सामने आया कि वाहन को पंचायत में लगाने के लिए न तो टेंडर प्रक्रिया अपनाई गई और न ही प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया कराई गई। ग्रामसभा की अनुमति भी नहीं ली गई। इसके बावजूद वाहन का उपयोग पंचायत के कार्यों में किया गया और सरकारी कोष से भुगतान कराया गया।

    जांच में वाहन के मालिक के रूप में सचिव के बेटे का नाम सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया। लोकायुक्त ने प्रथम दृष्टया माना कि पारिवारिक हित जुड़े होने के बावजूद निर्णय प्रक्रिया में सचिव की भूमिका रही और इससे बेटे को अनुचित आर्थिक लाभ पहुंचा।

   तीनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण संशोधन अधिनियम 2018 की धारा 13(1)(ए), 13(2) और भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 61(2) के तहत अपराध दर्ज किया गया है। मामले की आगे विवेचना जारी है। कार्रवाई लोकायुक्त महानिदेशक योगेश देशमुख के निर्देश और उप पुलिस महानिरीक्षक मनोज सिंह के मार्गदर्शन में की गई।

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