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धार

बारिश भी नहीं बनी रुकावट: भोजशाला के पीछे तय स्थान पर अदा हुई जुमे की नमाज, तिरपाल बिछाकर कराई व्यवस्था  

राजवाड़ा दर्पण
राजवाड़ा दर्पण
बारिश भी नहीं बनी रुकावट: भोजशाला के पीछे तय स्थान पर अदा हुई जुमे की नमाज, तिरपाल बिछाकर कराई व्यवस्था

 

खसरा नंबर 612 पर प्रशासन की बैरिकेडिंग, सुरक्षा के कड़े इंतजाम; भूमि विवाद के बीच शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई नमाज

धार। लगातार हो रही बारिश के बीच शुक्रवार को धार में जुमे की नमाज निर्धारित स्थान पर शांतिपूर्ण माहौल में अदा की गई। भोजशाला परिसर की बाउंड्रीवॉल से सटी खसरा नंबर 612 की जमीन पर प्रशासन ने पहले से व्यापक तैयारियां कर रखी थीं। बारिश के कारण जमीन पूरी तरह भीग जाने से नमाजियों की सुविधा के लिए पूरे क्षेत्र में तिरपाल बिछाए गए, जबकि चारों ओर बैरिकेडिंग कर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए। नमाज के दौरान किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर तैनात रहे।

संवेदनशील माने जाने वाले इस क्षेत्र में सुबह से ही पुलिस और प्रशासन की गतिविधियां तेज रहीं। अधिकारियों ने व्यवस्थाओं का लगातार निरीक्षण किया और नमाज शुरू होने से पहले सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। निर्धारित समय पर नमाज शांतिपूर्वक संपन्न हुई, जिसके बाद नमाजी तय मार्ग से अपने-अपने गंतव्य के लिए रवाना हो गए। पूरे आयोजन के दौरान कहीं से भी किसी तरह की अव्यवस्था या तनाव की सूचना नहीं मिली।

हालांकि जिस स्थान पर नमाज की व्यवस्था की गई, उसे लेकर विवाद अब भी बना हुआ है। स्थानीय रहवासियों का दावा है कि खसरा नंबर 612 की भूमि उनकी निजी कृषि भूमि है और वे वर्षों से वहां खेती करते आ रहे हैं। उनका कहना है कि इस संबंध में उन्होंने प्रशासन के समक्ष आपत्ति भी दर्ज कराई है। रहवासियों ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी आपत्तियों का समाधान नहीं हुआ तो वे न्यायालय की शरण लेंगे।

वहीं, कमाल मौला वेलफेयर सोसायटी के प्रतिनिधि अब्दुल समद का कहना है कि खसरा नंबर 611 और 612 से कमाल मौला मस्जिद स्पष्ट दिखाई देती है। इसी आधार पर आपसी सहमति और प्रशासनिक व्यवस्था के तहत इस स्थान पर जुमे की नमाज अदा कराई गई।

प्रशासन का कहना है कि उसकी प्राथमिकता कानून-व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द बनाए रखना है। अधिकारियों के अनुसार भूमि संबंधी दावों और आपत्तियों पर नियमानुसार परीक्षण एवं आवश्यक कार्रवाई की जाएगी, जबकि संवेदनशील मामलों में शांति बनाए रखने के लिए आगे भी पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।

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