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धार

बारिश में बह गया विकास: गड्ढों में तब्दील हुई सड़कें, हर सफर बना जानलेवा  

राजवाड़ा दर्पण
राजवाड़ा दर्पण
बारिश में बह गया विकास: गड्ढों में तब्दील हुई सड़कें, हर सफर बना जानलेवा

 

करोड़ों खर्च के बावजूद पहली बारिश में उखड़ी सड़कें; एक दर्जन से ज्यादा कॉलोनियों में बदहाल हालात, जिम्मेदार विभाग सवालों के घेरे में

     धार। मानसून की तेज बारिश ने शहर में सड़क निर्माण और मरम्मत कार्यों की गुणवत्ता की पोल खोल दी है। शहर से लेकर कॉलोनियों और ग्रामीण संपर्क मार्गों तक सड़कें गहरे गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं। हालात ऐसे हैं कि लोग तंज कस रहे हैं—"सड़क में गड्ढे हैं या गड्ढों में सड़क?" जगह-जगह डामर उखड़ चुका है और बारिश का पानी गड्ढों को ढक देने से दुर्घटनाओं का खतरा कई गुना बढ़ गया है। दोपहिया वाहन चालक सबसे ज्यादा परेशान हैं, जबकि चारपहिया वाहनों की रफ्तार भी थम गई है।

     सबसे खराब स्थिति दौलतनगर, क्वींस पार्क, इंद्रपुरी, चाणक्यपुरी और दीनदयालपुरम सहित एक दर्जन से अधिक कॉलोनियों की बताई जा रही है। रहवासियों का कहना है कि वर्षों से सड़क निर्माण की मांग की जा रही है, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। अब बारिश ने विकास के दावों की हकीकत सामने ला दी है।

     स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि हर साल सड़क निर्माण और मरम्मत पर लाखों-करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन पहली ही बारिश में सड़कें जवाब दे देती हैं। इससे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी लोग बदहाल सड़कों की तस्वीरें और वीडियो साझा कर जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं।

     शहर की बदहाल सड़कों का मुद्दा अब राजनीतिक रंग भी पकड़ने लगा है। युवक कांग्रेस ने मांडू रोड स्थित दौलतनगर सड़क निर्माण को लेकर नगर पालिका को सात दिन का अल्टीमेटम देते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है। नागरिकों का कहना है कि केवल गड्ढे भरने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि खराब निर्माण की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों की जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए।

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