93% निर्माण पूरा, पहली बार होगा नियंत्रित जलभराव; 52 गांवों की सिंचाई के लिए 200 करोड़ की नहर परियोजना अब भी मंजूरी के इंतजार में
धार। चार साल पहले टूटने के बाद पूरे देश में चर्चा और विवाद का केंद्र बना कारम बांध अब दोबारा मजबूती के साथ तैयार हो चुका है। इस मानसून में पहली बार बांध में पानी भी भरा जाएगा, लेकिन इससे जुड़े 52 गांवों के किसानों की सिंचाई की उम्मीद एक बार फिर अधूरी रह गई है। वजह यह है कि खेतों तक पानी पहुंचाने वाली मुख्य और वितरण नहरों का निर्माण अब तक शुरू नहीं हो पाया है। ऐसे में करोड़ों रुपए की परियोजना का पूरा लाभ फिलहाल किसानों को नहीं मिल सकेगा।
गुजरी क्षेत्र के भारुडपुरा-कोठिडा के पास स्थित कारम बांध का पुनर्निर्माण अंतिम चरण में है। जल संसाधन विभाग के अनुसार अब तक 93 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है, जबकि शेष कार्य अक्टूबर 2026 तक पूरा होने की संभावना है। इस वर्ष परीक्षण के तौर पर बांध की 45 मिलियन क्यूबिक मीटर क्षमता में केवल 25 से 30 प्रतिशत पानी संग्रहित किया जाएगा। यदि बारिश अधिक होती है तो अतिरिक्त पानी वेस्ट वीयर के माध्यम से सुरक्षित निकाला जाएगा।
हालांकि किसानों की सबसे बड़ी चिंता अब भी जस की तस है। वर्ष 2018 में परियोजना को मंजूरी मिलने के समय दावा किया गया था कि धार और खरगोन जिले के 52 गांवों की करीब 10,500 हेक्टेयर कृषि भूमि सिंचित होगी। लेकिन खेतों तक पानी पहुंचाने वाली नहरों के निर्माण के लिए आवश्यक करीब 200 करोड़ रुपए का प्रस्ताव अभी भी भोपाल में स्वीकृति का इंतजार कर रहा है। ऐसे में इस वर्ष किसानों को केवल भू-जल स्तर बढ़ने और नदी में बारहमासी जल प्रवाह का लाभ मिलेगा, जबकि प्रत्यक्ष सिंचाई का सपना फिलहाल अधूरा रहेगा।
तीन परतों में तैयार हुई नई पाल
12 अगस्त 2022 को कारम बांध की मुख्य पाल में रिसाव के बाद उसका बड़ा हिस्सा टूट गया था। इस घटना ने निर्माण गुणवत्ता और सरकारी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। पुनर्निर्माण के दौरान पुरानी संरचना हटाकर पूरी पाल नए सिरे से बनाई गई। मार्च 2024 से शुरू हुए कार्य में बीच में उच्च गुणवत्ता वाली काली मिट्टी तथा दोनों ओर मुरम, पीली मिट्टी और पत्थरों की परतें बिछाई गईं। आधुनिक मशीनों से लगातार सघनीकरण कर करीब 600 मीटर लंबी और 52 मीटर ऊंची पाल को पहले से अधिक मजबूत बनाया गया है।
तीन मानसून तक होगी चरणबद्ध जांच
जल संसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री एम.एस. चौहान ने बताया कि इस बार सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। पिछले दो वर्षों से युद्धस्तर पर निर्माण कार्य किया गया है। इस मानसून में केवल 25 से 30 प्रतिशत जलभराव होगा। अगले तीन मानसून तक बांध को चरणबद्ध तरीके से भरा जाएगा। पहले वर्ष स्पिलवे स्तर तक, दूसरे वर्ष गेट स्तर तक और तीसरे वर्ष पूर्ण जलभराव किया जाएगा। उन्होंने बताया कि नहर निर्माण का प्रस्ताव मुख्य अभियंता को भेज दिया गया है और बजट स्वीकृत होते ही कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
पूर्व अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा ने बताया कि कारम बांध का पुनर्निर्माण सबसे चुनौतीपूर्ण कार्य था। निर्माण के दौरान उच्च गुणवत्ता मानकों का पालन किया गया और पूरे कार्य की लगातार निगरानी की गई। अब किसानों की नजर नहर परियोजना की मंजूरी पर टिकी है, क्योंकि बांध तैयार होने के बावजूद खेतों तक पानी पहुंचने का इंतजार अभी खत्म नहीं हुआ है।