← वापस
मध्यप्रदेश

डीएफओ-रेंजर के नाम पर 55 हजार की वसूली! दो घुसखोर वनकर्मी लोकायुक्त के जाल में फंसे  

राजवाड़ा दर्पण
राजवाड़ा दर्पण
डीएफओ-रेंजर के नाम पर 55 हजार की वसूली! दो घुसखोर वनकर्मी लोकायुक्त के जाल में फंसे

 

बैतूल। पश्चिम वन मंडल कार्यालय में रिश्वतखोरी के मामले ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोमवार को भोपाल लोकायुक्त की टीम ने 55 हजार रुपए की रिश्वत लेते डीएफओ कार्यालय के दो कर्मचारियों को रंगेहाथ गिरफ्तार किया। आरोपियों की पहचान कंप्यूटर ऑपरेटर माखनलाल पाल और सहायक ग्रेड-2 अजय सिंह तोमर के रूप में हुई है। आरोप है कि दोनों ने वन रक्षक का विभागीय प्रकरण खत्म कराने के नाम पर रकम मांगी थी।

पुराना केस बना सौदेबाजी का आधार

वन रक्षक सुकांत पाठक के खिलाफ वर्ष 2023 से विभागीय प्रकरण लंबित था। बताया गया कि मामले में उन्हें पहले ही दंड मिल चुका था, लेकिन इसका असर उनकी आगामी पदोन्नति पर पड़ रहा था। आरोप है कि इसी प्रकरण को खत्म कराने और रास्ता साफ करने के नाम पर दोनों कर्मचारियों ने 55 हजार रुपए की मांग की।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि कर्मचारियों ने यह कहते हुए रकम मांगी कि पैसा आगे डीएफओ, एसडीओ और रेंजर तक पहुंचाया जाना है। हालांकि, यह दावा फिलहाल शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों और ट्रैप कार्रवाई के संदर्भ में सामने आया है। लोकायुक्त जांच में ही यह स्पष्ट होगा कि रकम के संबंध में किन लोगों की भूमिका थी।

500 के 110 नोट, रकम मिलते ही दबोचा

रिश्वत की मांग से परेशान वन रक्षक ने भोपाल लोकायुक्त में शिकायत की। शिकायत का सत्यापन कराने के बाद टीम ने ट्रैप की योजना बनाई। तय समय पर शिकायतकर्ता दोनों कर्मचारियों के पास 500 रुपए के 110 नोट यानी कुल 55 हजार रुपए लेकर पहुंचा।

जैसे ही रिश्वत की रकम आरोपियों ने स्वीकार की, लोकायुक्त टीम ने दोनों को पकड़ लिया। मौके से रकम बरामद की गई। कार्रवाई के बाद वन विभाग के कार्यालय में हड़कंप की स्थिति बन गई।

अब डीएफओ-रेंजर तक जांच की आंच?

मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि दोनों कर्मचारियों ने जिन वरिष्ठ अधिकारियों के नाम पर रकम लिए जाने की बात कही, उनकी इसमें कोई भूमिका थी या नहीं। डीएफओ और रेंजर का नाम सामने आने के कारण जांच का दायरा बढ़ने की संभावना है। हालांकि, वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका को लेकर अभी कोई निष्कर्ष नहीं निकला है और यह जांच का विषय है।

लोकायुक्त ने दोनों कर्मचारियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है। जांच में रिश्वत की मांग, रकम के लेन-देन और कथित तौर पर लिए गए नामों की भी पड़ताल की जाएगी।

        इनका कहना

सुकांत पाठक, शिकायतकर्ता वन रक्षक: विभागीय प्रकरण खत्म कराने के नाम पर रिश्वत मांगी गई थी। शिकायत के बाद लोकायुक्त ने ट्रैप की कार्रवाई की।

कवींद्र सिंह चौहान, डीएसपी, लोकायुक्त भोपाल: 55 हजार रुपए की रिश्वत लेते दो कर्मचारियों को ट्रैप किया गया है। मामले में नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जा रही है।

खबरें और भी हैं...