3.70 लाख का अर्थदंड तो लगा, पर शिकायतकर्ताओं का दावा- कीमती शीशम और आम के पेड़ों की कटाई जांच से बाहर; साक्ष्य छिपाने के भी आरोप
केवलारी। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) परिसर में हरे-भरे पेड़ों की कटाई के मामले में एसडीएम न्यायालय के आदेश के बाद नया विवाद खड़ा हो गया है। जांच में 74 पेड़ों की कटाई पाए जाने पर तत्कालीन प्राचार्य पर 3.70 लाख रुपये का अर्थदंड लगाया गया है, लेकिन शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि परिसर में काटे गए कीमती शीशम और आम के पेड़ों को जांच के दायरे में ही नहीं लिया गया।
शिकायतकर्ताओं का दावा है कि डाइट परिसर और प्राचार्य निवास के आसपास कई शीशम के पेड़ काटे गए थे। आरोप है कि कटे हुए ठूंठों को छिपाने के लिए उन पर सीमेंट-कांक्रीट का निर्माण कर दिया गया, ताकि अवैध कटाई के साक्ष्य मिटाए जा सकें। उनका कहना है कि जांच टीम को इस संबंध में जानकारी देने के बावजूद रिपोर्ट में इसका कोई उल्लेख नहीं किया गया।
एसडीएम न्यायालय के आदेश के अनुसार 66 आंवला, 5 करंज, 2 गुलमोहर और 1 खमेर सहित कुल 74 पेड़ों की कटाई पर प्रति पेड़ 5 हजार रुपये के हिसाब से 3.70 लाख रुपये का अर्थदंड लगाया गया। शिकायतकर्ताओं का सवाल है कि यदि शीशम और आम के पेड़ भी काटे गए थे, तो उन्हें जांच से बाहर क्यों रखा गया।
श्रमजीवी पत्रकार संघ के अध्यक्ष रफीक खान ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कर सभी तथ्यों को सार्वजनिक करने की मांग की है। उनका कहना है कि परिसर में बने सीमेंट-कांक्रीट के चबूतरे इस बात के संकेत हैं कि नीचे कटे हुए पेड़ों के साक्ष्य छिपे हो सकते हैं। उनका आरोप है कि पूरे मामले में जांच की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।