खरीफ सीजन में घटे बीमित किसान; ₹76.05 करोड़ प्रीमियम के मुकाबले सिर्फ ₹25.05 करोड़ का क्लेम, जागरूकता अभियान भी नहीं बदल सका तस्वीर
धार। किसानों को प्राकृतिक आपदा और फसल नुकसान से सुरक्षा देने के उद्देश्य से शुरू की गई प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना पर अब किसानों का भरोसा डगमगाने लगा है। कम क्लेम राशि और भुगतान को लेकर बढ़ती नाराजगी का असर इस खरीफ सीजन में साफ दिखाई दे रहा है। पिछले वर्ष की तुलना में अब तक 28 हजार से अधिक किसानों ने फसल बीमा नहीं कराया, जबकि सरकार लगातार जागरूकता अभियान चला रही है। किसानों का सीधा सवाल है- जब नुकसान लाखों का होता है तो मुआवजा सिर्फ सैकड़ों या कुछ हजार रुपए ही क्यों मिलता है?
कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार खरीफ-2025 में जिले के 3 लाख 14 हजार 895 किसानों ने फसल बीमा कराया था, जबकि 27 जुलाई 2026 तक केवल 2 लाख 86 हजार 804 किसान ही योजना से जुड़े हैं। यानी अंतिम तिथि से चार दिन पहले ही करीब 28 हजार किसान योजना से दूर हो चुके हैं। अब विभाग के सामने 31 जुलाई तक अधिक से अधिक किसानों को जोड़ने की चुनौती है। इसके लिए जिले में जागरूकता रथ भी निकाला गया है।
₹76 करोड़ प्रीमियम... क्लेम सिर्फ ₹25 करोड़
योजना पर सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं क्योंकि खरीफ-2025 में किसानों से ₹76.05 करोड़ का प्रीमियम जमा हुआ, लेकिन फसल नुकसान के एवज में सिर्फ ₹25.05 करोड़ का क्लेम भुगतान किया गया। वहीं रबी-2025 में ₹21.28 करोड़ प्रीमियम जमा होने के बावजूद अब तक भुगतान नहीं हुआ है। किसानों का आरोप है कि कई मामलों में पूरे सीजन के नुकसान के बाद भी उन्हें ₹600 से ₹700 तक का ही मुआवजा मिला।
किसान बोले- खेत नहीं, पूरे क्षेत्र को मानते हैं इकाई
भारतीय किसान संघ के जिला महामंत्री अमोल पाटीदार का कहना है कि योजना की सबसे बड़ी खामी यह है कि व्यक्तिगत खेत को इकाई नहीं माना जाता, जिससे वास्तविक नुकसान झेलने वाले किसान को भी उचित मुआवजा नहीं मिल पाता। मालवा में पिछले साल सोयाबीन की फसल खराब होने पर भी कई किसानों को नाममात्र की राशि मिली।
कृषि विभाग का पक्ष
उप संचालक कृषि विजय चौरसिया के अनुसार फसल नुकसान का आकलन निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किया जाता है। व्यक्तिगत खेत के बजाय अधिसूचित इकाई के आधार पर भुगतान होता है, इसलिए कई बार किसानों को राशि कम लगती है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक जोखिम से बचाव के लिए किसानों को अधिक से अधिक फसल बीमा कराने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
तहसीलों में यह स्थिति
जिले में सबसे अधिक बीमित किसान धार (93,682), सरदारपुर (73,027) और बदनावर (59,127) तहसील में हैं, जबकि धरमपुरी, गंधवानी, मनावर, कुक्षी और पीथमपुर में बीमा कराने वाले किसानों की संख्या अपेक्षाकृत कम है।
एक नजर में
खरीफ-2025 में बीमित किसान: 3,14,895
खरीफ-2026 (27 जुलाई तक): 2,86,804
योजना से दूर हुए किसान: करीब 28,000
खरीफ-2025 प्रीमियम: ₹76.05 करोड़
क्लेम भुगतान: ₹25.05 करोड़
रबी-2025 प्रीमियम: ₹21.28 करोड़
रबी क्लेम भुगतान: अब तक शून्य