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भोपाल

गुरु पूर्णिमा से पहले खुलेंगे सभी सांदीपनि विद्यालय,सीएम के निर्देश; गुरु-शिष्य परंपरा को मिलेगा नया विस्तार

राजवाड़ा दर्पण
राजवाड़ा दर्पण
गुरु पूर्णिमा से पहले खुलेंगे सभी सांदीपनि विद्यालय,सीएम के निर्देश; गुरु-शिष्य परंपरा को मिलेगा नया विस्तार

'महर्षि सांदीपनि श्रद्धा पर्व' पूरे प्रदेश में मनाया जाएगा, हर स्कूल में होगा गुरु पूजन और सांस्कृतिक आयोजन

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने गुरु पूर्णिमा को प्रदेशव्यापी जन-आंदोलन का स्वरूप देने की तैयारी शुरू कर दी है। सोमवार को आयोजित समीक्षा बैठक में उन्होंने निर्देश दिए कि जिन सांदीपनि विद्यालयों का लोकार्पण अभी बाकी है,उन्हें गुरु पूर्णिमा से पहले हर हाल में शुरू किया जाए। साथ ही प्रदेशभर में 'महर्षि सांदीपनि श्रद्धा पर्व' के रूप में गुरु पूर्णिमा मनाते हुए भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा और प्राचीन ज्ञान परंपरा का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरु ही अज्ञान के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाने वाले पथ-प्रदर्शक हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप भारतीय संस्कृति,गुरुकुल परंपरा और गुरुजनों के सम्मान को नई पीढ़ी तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने के लिए सभी शासकीय और निजी शिक्षण संस्थानों की सहभागिता सुनिश्चित की जाए।

बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को महर्षि सांदीपनि के जीवन,उनके आदर्शों और गुरुकुल शिक्षा पद्धति में योगदान पर आधारित 10 से 20 पृष्ठों की लघु पुस्तिका प्रकाशित कर प्रदेश के सभी विद्यालयों में वितरित करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विद्यालय, महाविद्यालय, औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान और विश्वविद्यालय में गुरु पूजन, व्याख्यान, छात्र-शिक्षक संवाद, सांस्कृतिक कार्यक्रम और साहित्यिक प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएं। मित्रता दिवस पर विद्यार्थियों को श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता का प्रेरक प्रसंग भी बताया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरु पूर्णिमा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और मूल्यों को सशक्त करने का अवसर है। इसे जनभागीदारी का उत्सव बनाया जाए, ताकि विद्यार्थियों और युवाओं में गुरुजनों के प्रति सम्मान तथा भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति आस्था और मजबूत हो।

बैठक में अपर मुख्य सचिव शिवशेखर शुक्ला ने बताया कि 29 जुलाई को गुरु पूर्णिमा के अवसर पर प्रदेशभर के विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में मां सरस्वती पूजन, गुरु सम्मान, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, भाषण, संवाद और विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। इसके लिए सभी शिक्षण संस्थानों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जा रहे हैं।

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