25 हजार से अधिक की साइबर ठगी पर तुरंत दर्ज हो रही शिकायत, लेकिन बयान और हस्ताक्षर नहीं मिलने से बढ़ रही पेंडेंसी
भोपाल। साइबर ठगी के पीड़ितों को त्वरित राहत देने के उद्देश्य से शुरू की गई ई-जीरो एफआईआर व्यवस्था अब पुलिस के लिए नई प्रशासनिक चुनौती बन गई है। हाल ही में 25 हजार रुपए या उससे अधिक की साइबर ठगी के मामलों में ई-जीरो एफआईआर दर्ज करने की व्यवस्था लागू की गई है, लेकिन बड़ी संख्या में ऐसे मामले सामने आ रहे हैं जिनमें शिकायतकर्ता दूसरे राज्यों में रहने के कारण आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं कर पा रहे हैं।
नियमों के अनुसार ई-जीरो एफआईआर को नियमित एफआईआर में बदलने के लिए शिकायतकर्ता के भौतिक हस्ताक्षर और बयान आवश्यक हैं। लेकिन जब संबंधित थाने की पुलिस फरियादियों से संपर्क करती है, तो वे नौकरी, पढ़ाई या व्यवसाय के कारण दूसरे राज्यों में होने का हवाला देकर थाने आने में असमर्थता जताते हैं। इससे जांच अधूरी रह जाती है और मामलों की पेंडेंसी लगातार बढ़ रही है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार कई शिकायतकर्ता साइबर पोर्टल पर शिकायत दर्ज करते समय आधार कार्ड या अन्य दस्तावेजों में दर्ज मध्य प्रदेश के स्थायी पते का उपयोग करते हैं। इसके आधार पर संबंधित जिले में स्वतः ई-जीरो एफआईआर दर्ज हो जाती है, जबकि शिकायतकर्ता किसी अन्य राज्य में रह रहा होता है। ऐसे में स्थानीय पुलिस को जांच आगे बढ़ाने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है।
इसी तरह का एक मामला पुणे में नौकरी कर रहे ग्वालियर निवासी युवक का सामने आया, जो ऑनलाइन रेटिंग टास्क के नाम पर साइबर ठगी का शिकार हुआ। शिकायत दर्ज होने के बाद उसने थाने पहुंचने में असमर्थता जताई। ऐसे मामलों में बढ़ोतरी के कारण साइबर अपराधों की जांच प्रभावित हो रही है और लंबित प्रकरणों की संख्या लगातार बढ़ रही है।