नर्मदा लाइन की टेस्टिंग के दौरान गोराकुंड चौराहे पर धंसी सड़क; तेज बहाव से बना बड़ा गड्ढा, निर्माण की गुणवत्ता पर उठे सवाल
इंदौर। गोराकुंड चौराहे के पास करीब 40 करोड़ रुपए की लागत से बनी स्मार्ट सिटी सड़क का बड़ा हिस्सा अचानक धंस गया। सड़क के नीचे बिछाई गई नर्मदा लाइन की टेस्टिंग के दौरान रिसाव होने से पानी का तेज बहाव शुरू हुआ। दबाव बढ़ने के साथ ही सड़क की सतह बैठ गई और देखते ही देखते यहां बड़ा गड्ढा बन गया। घटना का वीडियो प्रसारित होने के बाद स्मार्ट सिटी के कामों की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
बताया जा रहा है कि सड़क का निर्माण करीब एक साल पहले हुआ था। करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद नई सड़क के इस तरह धंसने से निर्माण कार्य की गुणवत्ता और सड़क के नीचे किए गए भराव पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पाइपलाइन की टेस्टिंग के दौरान ही सड़क का बड़ा हिस्सा बैठ जाना गंभीर स्थिति है।
मौके पर पानी के तेज बहाव से कुछ देर अफरा-तफरी की स्थिति बनी रही। संबंधित अधिकारियों ने पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। अब सड़क धंसने के कारणों की जांच की जाएगी। इसमें पाइपलाइन रिसाव के साथ सड़क के नीचे किए गए भराव, सामग्री की गुणवत्ता और निर्माण में निर्धारित मानकों के पालन की भी जांच होगी।
बबलू शर्मा बोले- पहले ही जताई थीं स्मार्ट सिटी के कामों पर आपत्तियां
एमआईसी सदस्य बबलू शर्मा ने कहा कि यह काम वर्ष 2021 के स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत हुआ था। वर्ष 2022 में पुष्यमित्र भार्गव के नेतृत्व में परिषद बनने के बाद स्मार्ट सिटी के कार्यों को लेकर आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं। महापौर की ओर से भी संबंधित कार्यों को लेकर पत्र लिखा गया था।
उन्होंने बताया कि जिस कंपनी ने काम किया था, उसे ब्लैकलिस्ट किया गया था। अधूरी नर्मदा लाइन के कारण लोगों को परेशानी हो रही थी, इसलिए कुछ दिन पहले दूसरी एजेंसी से काम शुरू कराया गया था। लाइन की टेस्टिंग के दौरान रिसाव हुआ और तेज बहाव के कारण सड़क धंस गई। शर्मा ने कहा कि पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और जांच में जो भी जिम्मेदार पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
राजेंद्र राठौड़ बोले- स्मार्ट सिटी के कामों की होनी चाहिए जांच
एमआईसी सदस्य राजेंद्र राठौड़ ने भी स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के कार्यों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया है। राठौड़ ने कहा कि प्रोजेक्ट से जुड़े कार्यों में यदि भ्रष्टाचार या अनियमितता हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच होना चाहिए। जिम्मेदार पाए जाने वाले लोगों पर कार्रवाई के साथ उन्हें सजा भी मिलनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि सड़क धंसने की घटना को केवल पाइपलाइन रिसाव मानकर मामला खत्म नहीं किया जाना चाहिए। सड़क निर्माण से लेकर पाइपलाइन बिछाने और टेस्टिंग तक पूरे काम की जांच जरूरी है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि सड़क धंसने की मुख्य वजह पाइपलाइन का रिसाव था या निर्माण में भी गंभीर लापरवाही हुई।