इंदौर। शहर और आसपास के इलाकों में सड़कों पर गाड़ियों की आवाजाही को बेहतर बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा जनहित याचिका में दिए गए निर्देशों के तहत गठित 'ट्रैफिक रेगुलेटरी कमेटी' को एक विस्तृत सुझाव पत्र (प्रतिनिधित्व) सौंपा गया।
यह सुझाव पत्र समिति के सदस्य और वरिष्ठ अधिवक्ता विनय झैलावत और अधिवक्ता विवेक पटवा को सौंपा गया। इस दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता एससी बागड़िया, वरिष्ठ अधिवक्ता विशाल बाहेती समेत कई अन्य कानून विशेषज्ञ मौजूद रहे। समिति के सदस्यों ने इन सुझावों पर सकारात्मक रुख दिखाते हुए आश्वासन दिया कि इन्हें संबंधित सक्षम अधिकारियों के सामने रखा जाएगा, ताकि इंदौर के नागरिकों के हित में जल्द ही ठोस निर्णय लिए जा सकें।
तकनीक और सख्त नियमों से ट्रैफिक नियम तोड़ना रुकेगा
सुझाव पत्र में सड़कों पर गाड़ियों के दबाव को घटाने और सड़क सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए कई अहम बातें कही गई हैं। बार-बार रेड लाइट तोड़ने, गलत दिशा में गाड़ी चलाने, तेज रफ्तार और अवैध पार्किंग पर लगाम लगाने के लिए एएनपीआर कैमरों और ई-चालान जैसी आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल पर जोर दिया गया है। इसके अलावा, चालानों को सीधे फास्टैग, डिजिटल पेमेंट सिस्टम और गाड़ियों के इंश्योरेंस रिन्यूअल से जोड़ने की बात कही गई। लोगों की सुविधा के लिए चालान के साथ फोटो या वीडियो सबूत देने और ऑनलाइन सुनवाई की व्यवस्था बनाने का सुझाव भी दिया गया है।
सर्विस लेन का सही इस्तेमाल और अतिक्रमण पर रोक
अक्सर लोग चौराहों के सिग्नल से बचने के लिए सर्विस लेन का गलत इस्तेमाल करते हैं, जिससे हादसों का डर बना रहता है। इसे रोकने के लिए वैज्ञानिक तरीके से एंट्री और एग्जिट तय करने, बैरियर लगाने, वन-वे व्यवस्था लागू करने और सीसीटीवी कैमरों से निगरानी करने का प्रस्ताव है। इसके साथ ही नगर निगम और ट्रैफिक पुलिस की संयुक्त टीमों द्वारा सड़कों और फुटपाथों से अतिक्रमण हटाने के लिए समयबद्ध अभियान चलाने की सिफारिश की गई है। दुकानदारों और वेंडर्स के लिए अलग से वेंडिंग ज़ोन बनाने की बात भी कही गई है, जिससे पैदल चलने वालों को सुरक्षित रास्ता मिल सके।
डेटा के आधार पर पुलिसकर्मियों की तैनाती और नई तकनीक
शहर में केवल उन्हीं जगहों पर पुलिस बल तैनात किया जाए, जहां वास्तव में जाम या दुर्घटना का खतरा ज्यादा रहता है। इसके लिए कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से मिलने वाले लाइव डेटा की मदद ली जाए। इसके अलावा 'इंदौर ट्रैफिक साथी' मोबाइल ऐप को आईटीएमएस से जोड़कर ज्यादा उपयोगी बनाने का विचार रखा गया है। इस ऐप के जरिए वाहन चालकों को ट्रैफिक जाम, सिग्नल की स्थिति और अपने चालान की जानकारी तुरंत मिल सकेगी।
अच्छे चालकों को मिलेगा इनाम और देश-विदेश के मॉडलों से सीख
सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए नागपुर के 'ट्रैफिक रिवार्ड्स' मॉडल की तर्ज पर नियम मानने वाले चालकों को रिवॉर्ड पॉइंट देने और इंश्योरेंस प्रीमियम में छूट जैसी प्रोत्साहन योजना शुरू करने का सुझाव है। साथ ही मिजोरम के आइज़ोल शहर की तरह खुद से ट्रैफिक नियम मानने की आदत डालने के लिए स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता अभियान चलाने की सिफारिश की गई। इंदौर के यातायात को विश्वस्तरीय बनाने के लिए चेन्नई, बेंगलुरु के साथ-साथ स्वीडन, नीदरलैंड और नॉर्वे जैसे देशों के सफल ट्रैफिक प्रबंधन सिस्टम की अध्ययन रिपोर्ट तैयार कर उन्हें चरणबद्ध तरीके से लागू करने की बात कही गई है।