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भोपाल

जंगल में बंदूक चलाने पर वनकर्मियों पर सीधे केस नहीं: मध्यप्रदेश में ऐतिहासिक अधिसूचना; पहले न्यायिक जांच, तभी पुलिस कार्रवाई

राजवाड़ा दर्पण
राजवाड़ा दर्पण
जंगल में बंदूक चलाने पर वनकर्मियों पर सीधे केस नहीं: मध्यप्रदेश में ऐतिहासिक अधिसूचना; पहले न्यायिक जांच, तभी पुलिस कार्रवाई

वनरक्षकों से लेकर मुख्य वन संरक्षकों तक को संरक्षण; ड्यूटी के दौरान हथियार इस्तेमाल की हर घटना की कार्यपालिक दंडाधिकारी करेंगे जांच

      भोपाल। मध्यप्रदेश के जंगलों की सुरक्षा में तैनात वनकर्मियों के लिए राज्य सरकार ने बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला लिया है। वन विभाग ने 7 अगस्त 2026 को अधिसूचना जारी कर ड्यूटी के दौरान आग्नेयास्त्र का इस्तेमाल करने वाले वनकर्मियों को आपराधिक कार्रवाई से महत्वपूर्ण कानूनी संरक्षण दिया है। अब वनकर्मी द्वारा ड्यूटी के दौरान हथियार चलाने की घटना में पुलिस सीधे आपराधिक प्रकरण दर्ज कर गिरफ्तारी नहीं कर सकेगी। पहले संबंधित क्षेत्र के कार्यपालिक दंडाधिकारी से न्यायिक जांच कराई जाएगी।

    अधिसूचना में कहा गया है कि वन और वन्यजीवों की सुरक्षा के दौरान वनकर्मियों को कई बार हथियारों का इस्तेमाल करना पड़ता है। ऐसे मामलों में उनके खिलाफ अनावश्यक या दुर्भावनापूर्ण आपराधिक कार्रवाई शुरू होने की आशंका रहती है। इसी को देखते हुए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 218 के तहत यह व्यवस्था लागू की गई है।

   पहले जांच में तय होगा हथियार चलाना उचित था या नहीं

   अधिसूचना के अनुसार वनरक्षक, वनपाल, उप वन क्षेत्रपाल, वन क्षेत्रपाल, सहायक वन संरक्षक, उप वनमंडल अधिकारी से लेकर वनमंडल अधिकारी, मुख्य वन संरक्षक और अन्य अधिकृत वन अधिकारियों पर यह प्रावधान लागू होगा।

     ड्यूटी के दौरान हथियार चलाने की प्रत्येक घटना की जांच संबंधित क्षेत्र के कार्यपालिक दंडाधिकारी करेंगे। पुलिस कार्रवाई, आपराधिक प्रकरण या गिरफ्तारी तभी संभव होगी, जब जांच में हथियार का इस्तेमाल अनावश्यक, अनुचित या जरूरत से ज्यादा पाया जाए और राज्य सरकार उस जांच रिपोर्ट को स्वीकार कर ले।

     यह फैसला वन एवं वन्यजीव संरक्षण के दौरान फील्ड में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वनकर्मियों को कानूनी संरक्षण देने की दिशा में पूर्व प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख (पीसीसीएफ-हॉफ) विजय अंबाडे द्वारा शुरू किए गए प्रस्ताव को अब शासन की अधिसूचना के रूप में औपचारिक रूप मिल गया है।

जंगल में बंदूक चलाने पर वनकर्मियों पर सीधे केस नहीं: मध्यप्रदेश में ऐतिहासिक अधिसूचना; पहले न्यायिक जांच, तभी पुलिस कार्रवाई - 2

ड्यूटी पर तैनात फील्ड स्टाफ को कानूनी संरक्षण देने के इस फैसले के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल को वनकर्मियों की ओर से बधाई दी जा रही है। अधिसूचना मध्यप्रदेश राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से प्रभावी होगी।

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