भाइयों की कलाई पर राखी बांध बहनों ने मांगी रिहाई की दुआ; जेल अधीक्षकों ने कहा- ऐसी गलती न करें कि परिवार से दूर होना पड़े
भोपाल/ग्वालियर/धार/झाबुआ/भैरुंदा। रक्षाबंधन पर प्रदेश की जेलों में शुक्रवार को भाई-बहन के रिश्ते की भावुक तस्वीरें सामने आईं। जेल की ऊंची दीवारों और कड़ी सुरक्षा के बीच बहनें अपने बंदी भाइयों से मिलने पहुंचीं। किसी ने तिलक कर राखी बांधी तो किसी ने भाई को मिठाई खिलाकर जल्द घर लौटने की प्रार्थना की। कई बहनों की आंखों से आंसू छलक पड़े। भाइयों ने भी भविष्य में ऐसी गलती न करने का संकल्प लिया।
ग्वालियर में 7 हजार से ज्यादा बहनें पहुंचीं। केंद्रीय जेल में सुबह 7 बजे से ही बहनों की भीड़ जुटने लगी। यहां करीब 3400 बंदी निरुद्ध हैं। दोपहर 1 बजे तक 7 हजार से अधिक बहनें भाइयों को राखी बांध चुकी थीं। जेल प्रबंधन ने सुरक्षा के लिए जेल रोड पर बैरिकेडिंग कर आवागमन बंद रखा। मोबाइल और पर्स बाहर जमा कराए गए। जेल अधीक्षक राकेश कुमार ने बताया कि बहनों के लिए जेल परिसर में मिठाई समेत जरूरी व्यवस्थाएं की गईं। उन्होंने कहा कि शेष बहनों को भी भाइयों से मिलाने की व्यवस्था की जाएगी।
झाबुआ में 250 कैदियों को राखी। जिला कारागार में करीब 280 बंदियों में से लगभग 250 भाइयों को उनकी बहनों ने राखी बांधी। बड़ी संख्या में परिजन पहुंचने से जेल परिसर में भावुक माहौल रहा। बहनों ने भाइयों की जल्द रिहाई के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। जेल अधीक्षक सुजीत खरे ने कहा कि कोई ऐसा काम न करें, जिससे भाई-बहन को जेल की चारदीवारी के बीच रक्षाबंधन मनाना पड़े।
धार में 65 बंदियों से मिलीं 116 बहनें। जिला जेल में सुबह से ही बहनों का पहुंचना शुरू हो गया। पहले पंजीयन और जांच के बाद उन्हें सुरक्षा के बीच भाइयों से मिलने भेजा गया। सुबह 11:30 बजे तक 65 बंदी भाइयों को 116 बहनों ने राखी बांधी। इनके साथ 10 वर्ष तक की उम्र के 68 बच्चे भी पहुंचे थे।
भैरुंदा में 90 फीसदी बंदियों की बहनें पहुंचीं। सब जेल में करीब 99 बंदी निरुद्ध हैं। इनमें करीब 90 प्रतिशत बंदियों की बहनें राखी बांधने पहुंचीं। जेल प्रशासन ने तिलक, कुमकुम, चावल, दीपक और पूजा की थाली की व्यवस्था की। बहनों ने भाइयों से कहा- अब ऐसी गलती दोबारा मत करना। भाइयों ने भी परिवार से दूर न होने का संकल्प लिया।
भोपाल में कड़ी सुरक्षा के बीच राखी। केंद्रीय जेल में जेल अधीक्षक मानवेन्द्र सिंह परिहार की मौजूदगी में रक्षाबंधन मनाया गया। बहनों ने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उनके बेहतर भविष्य की कामना की। जेल में संवेदनशील बंदियों को देखते हुए विशेष सुरक्षा व्यवस्था रही। राखी के दौरान जेल की चारदीवारी के बीच भी भाई-बहन के प्रेम और बिछड़ने का दर्द साफ दिखाई दिया।