कटनी/जबलपुर। जमीन सौदे में पुलिस कार्रवाई का दबाव बनाने के आरोपों से घिरीं कटनी की पूर्व नगर पुलिस अधीक्षक नेहा पच्चीसिया के खिलाफ आखिरकार एफआईआर दर्ज हो गई। 19 अगस्त को कुठला थाने में दर्ज केस के बाद पुलिस उनकी तलाश कर रही है। एफआईआर दर्ज होने के समय पच्चीसिया भोपाल के पुलिस ट्रेनिंग सेंटर में प्रशिक्षण ले रही थीं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, केस की जानकारी मिलने के बाद वह ट्रेनिंग सेंटर से चली गईं। हालांकि, उन्हें अभी आधिकारिक तौर पर फरार घोषित नहीं किया गया है। मामले में नामजद दो अन्य आरोपी भी पुलिस की पकड़ से बाहर बताए जा रहे हैं।
हत्या केस में कार्रवाई के दबाव का आरोप
मामला कटनी के चर्चित हत्या प्रकरण से जुड़ा है। आरोप है कि हत्या के मामले में कार्रवाई और गिरफ्तारी का दबाव बनाकर आरोपी के परिवार पर जमीन बेचने के लिए दबाव बनाया गया। शिकायत में जमीन की रजिस्ट्री बाजार और गाइडलाइन मूल्य से कम रकम पर कराने के आरोप भी लगाए गए हैं।
आकाश लोधी की शिकायत के बाद मामले की जांच का दायरा बढ़ा। आरोपों की गंभीरता को देखते हुए जबलपुर आईजी के निर्देशन में जांच कराई गई। एएसपी अनु बेनीवाल ने करीब 20 दिन तक जांच की और करीब एक दर्जन लोगों के बयान दर्ज किए। जमीन की रजिस्ट्री, बैंक लेन-देन और अन्य दस्तावेजों की जांच के बाद रिपोर्ट आईजी को सौंपी गई। रिपोर्ट में आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए।
82.86 लाख की जमीन, सौदे और भुगतान पर सवाल
एफआईआर में नेहा पच्चीसिया के साथ जमीन खरीदार मारूफ अहमद हनफी और कथित मध्यस्थ क्षितिज राज बारापत्रे को आरोपी बनाया गया है। जांच में सामने आया कि जमीन का गाइडलाइन मूल्य करीब 82.86 लाख रुपए था, जबकि सौदा करीब 1.07 करोड़ रुपए में तय होने की बात सामने आई। रजिस्ट्री के समय 15 लाख रुपए के चेक से भुगतान किए जाने की जानकारी भी जांच में सामने आई है। अब पुलिस यह पता लगा रही है कि वास्तविक सौदा कितने में हुआ और पूरी रकम का भुगतान किस तरह किया गया।
पहले भी आई थी शिकायत
पच्चीसिया के खिलाफ इससे पहले भी शिकायत विभाग तक पहुंच चुकी थी। 22 जुलाई को ट्रांसपोर्टर महेंद्र जैन ने एसपी कार्यालय में शिकायत देकर 30 हजार रुपए की अवैध वसूली का आरोप लगाया था। इसकी जांच चल ही रही थी कि जमीन सौदे से जुड़ी शिकायत सामने आ गई।
कई पुलिसकर्मी निलंबित
मामले का असर पुलिस विभाग तक पहुंचा है। हत्या प्रकरण की जांच से जुड़े एसआई सौरभ सोनी, सीएसपी के ड्राइवर और गनमैन समेत पांच पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है। जांच के दौरान सीएसपी के अधिकार क्षेत्र के माधवनगर, रंगनाथ नगर, एनकेजे और कुठला थानों की जिम्मेदारी भी वापस लेकर अजाक डीएसपी शिवा पाठक को सौंपी गई थी।
एफआईआर के बाद मामले की आगे की विवेचना एएसपी अंजना तिवारी को दी गई है। पुलिस बैंक खातों, रजिस्ट्री, कॉल डिटेल और डिजिटल रिकॉर्ड खंगाल रही है। कार्यालय को सील कर दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित किए गए हैं। पच्चीसिया समेत तीनों आरोपियों ने गिरफ्तारी से राहत के लिए अग्रिम जमानत याचिका भी दायर की है।