राष्ट्रीय ओबीसी युवा महासंघ ने निष्पक्ष जांच की मांग उठाई, वंचित बहुजन आघाड़ी के बंद को व्यापारियों का मिला व्यापक समर्थन
खामगांव। दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों पर कथित लाठीचार्ज और बल प्रयोग के विरोध में गुरुवार को खामगांव में विरोध का व्यापक स्वरूप देखने को मिला। महाराष्ट्र राष्ट्रीय ओबीसी युवा महासंघ ने सुबह 11 बजे एसडीओ के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर घटना की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच तथा दोषियों पर कार्रवाई की मांग की। वहीं, वंचित बहुजन आघाड़ी के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रकाश आंबेडकर के आह्वान पर बुलाए गए महाराष्ट्र बंद का भी शहर में व्यापक असर दिखाई दिया और अधिकांश बाजार बंद रहे।
महासंघ द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया कि संविधान प्रत्येक नागरिक को शांतिपूर्ण प्रदर्शन और अपनी बात रखने का अधिकार देता है। ऐसे में प्रदर्शनरत विद्यार्थियों पर बल प्रयोग लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। ज्ञापन में मांग की गई कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, छात्रों पर अनावश्यक बल प्रयोग करने वालों के खिलाफ कार्रवाई हो तथा केंद्र सरकार नागरिकों की अभिव्यक्ति, शांतिपूर्ण प्रदर्शन और आवागमन के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करे। संगठन ने कहा कि लोकतंत्र में मतभेदों का समाधान संवाद से होना चाहिए, बल प्रयोग से नहीं।
दूसरी ओर, वंचित बहुजन आघाड़ी के राज्यव्यापी बंद का खामगांव में भी व्यापक असर देखने को मिला। सुबह से ही मेन रोड, गांधी चौक, महावीर चौक, मोहन चौक, शाला क्रमांक क्षेत्र, टावर चौक, भगत सिंह चौक और फरसी सहित शहर के प्रमुख बाजारों में अधिकांश दुकानें बंद रहीं। छोटे-बड़े व्यापारियों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने भी बंद का समर्थन करते हुए अपने प्रतिष्ठान बंद रखे। दिनभर प्रमुख बाजारों में सामान्य कारोबार प्रभावित रहा।
ज्ञापन पर सूरज बेलोकर, रामेश्वर कापड़े, मकसूद शाह, कैलाश अंबुसकर, प्रकाश जायसवाल, जुनैद शाह, शेख हुसैन, प्रतिक लोखंडकार, दीपक जैन, नंदकिशोर धरमकार, विनोद लाहुडकार, संजय धोंड सहित अन्य पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं के हस्ताक्षर रहे। संगठन ने कहा कि युवाओं की आवाज को दबाने के बजाय उनकी बात सुनी जानी चाहिए और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए सरकार को संवेदनशीलता के साथ कदम उठाने चाहिए।