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मध्यप्रदेश

कागजों में पुलिया, जमीन पर नाली! लाखों के विकास कार्य पर उठे सवाल

राजवाड़ा दर्पण
राजवाड़ा दर्पण
कागजों में पुलिया, जमीन पर नाली! लाखों के विकास कार्य पर उठे सवाल

भुगतान के बाद भी नहीं मिली पुलिया, नया भुगतान और सरपंच प्रतिनिधि का वायरल वीडियो बना चर्चा का विषय

दमोह/पटेरा। पटेरा जनपद की ग्राम पंचायत धनगुवां एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। विकास कार्यों में अनियमितताओं के आरोपों ने पंचायत की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का दावा है कि सरकारी अभिलेखों में पुलिया निर्माण पूरा दिखाया गया, लेकिन मौके पर पुलिया के बजाय केवल साधारण नाली नजर आ रही है। मामले ने तूल तब पकड़ा जब सरपंच प्रतिनिधि का कथित दबंगई से जुड़ा वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

जानकारी के अनुसार पांचवें राज्य वित्त आयोग से करीब तीन लाख रुपए की लागत से पुलिया निर्माण स्वीकृत हुआ था। आरोप है कि करीब 2.69 लाख रुपए का भुगतान भी निकाल लिया गया, लेकिन स्थल पर पुलिया का निर्माण नहीं मिला। मामला मीडिया में आने के बाद कथित तौर पर पुलिया की जगह नाली का निर्माण कर औपचारिकता पूरी कर दी गई।

ग्रामीणों का कहना है कि जिस कार्य में पहले ही लाखों रुपए खर्च दर्शाए जा चुके थे, उसी कार्य के लिए बाद में मजदूरों और मिस्त्रियों के नाम पर करीब 30 हजार रुपए का अतिरिक्त भुगतान भी किया गया। इससे भुगतान प्रक्रिया और निर्माण कार्य की पारदर्शिता पर सवाल और गहरा गए हैं।

इधर, सरपंच प्रतिनिधि संतोष यादव का कथित दबंगई वाला वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पंचायत की कार्यशैली पर नई बहस छिड़ गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्वाचित सरपंच सियारानी की अपेक्षा पंचायत संचालन में उनके परिजन की भूमिका अधिक प्रभावी है, जो पंचायत राज व्यवस्था की मूल भावना के विपरीत है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब पुलिया स्वीकृत हुई थी तो उसका निर्माण आखिर कहां हुआ? यदि बाद में नाली बनाई गई तो लाखों रुपए किस कार्य पर खर्च हुए? ग्रामीणों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच, वित्तीय ऑडिट और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों व जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की है। मामले ने पंचायत में विकास कार्यों की पारदर्शिता और सरकारी धन के उपयोग पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।

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