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मध्यप्रदेश

कैमरा घड़ी में... और खामोश थे अधिकारी!  

राजवाड़ा दर्पण
राजवाड़ा दर्पण
कैमरा घड़ी में... और खामोश थे अधिकारी!

 

बिलकिसगंज अस्पताल में हिडन कैमरा मिलने से हड़कंप; महिला स्वास्थ्यकर्मियों ने मंत्री करण सिंह वर्मा का काफिला रोककर सौंपा ज्ञापन

सीहोर। बिलकिसगंज के सरकारी अस्पताल में दीवार घड़ी के अंदर कथित हिडन कैमरा और मेमोरी कार्ड मिलने से महिला स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा और निजता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। 13 अगस्त को संदिग्ध उपकरण मिलने के बाद अस्पताल स्टाफ में डर और आक्रोश का माहौल है। आरोप है कि मामला सामने आने के बावजूद विभागीय स्तर पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। इससे नाराज महिला स्वास्थ्यकर्मियों ने इछावर विधायक एवं राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा के काफिले को रास्ते में रोककर ज्ञापन सौंपा।

      घड़ी में कैमरा मिला,कर्मचारियों में बढ़ी चिंता

कर्मचारियों के मुताबिक, अस्पताल के एक कक्ष में दीवार पर लगी घड़ी के अंदर कैमरा छिपा मिला। साथ में मेमोरी कार्ड भी बरामद हुआ। महिला कर्मचारियों का कहना है कि अस्पताल जैसे सार्वजनिक संस्थान में इस तरह उपकरण लगाया जाना उनकी निजता, गरिमा और सुरक्षा से जुड़ा बेहद गंभीर मामला है। उन्होंने जांच की मांग करते हुए पूछा कि कैमरा किसने,कब और किस उद्देश्य से लगाया था।

     मंत्री ने गाड़ी में बैठकर सुनी शिकायत

महिला स्वास्थ्यकर्मियों ने मंत्री करण सिंह वर्मा के वाहन को रोककर अपनी शिकायत बताई और ज्ञापन सौंपा। मंत्री ने वाहन में ही ज्ञापन पढ़ा और कर्मचारियों की बात सुनी। उन्होंने मामले को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच,सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा दिलाया।

     कहीं और तो नहीं लगे ऐसे कैमरे?

कर्मचारियों ने मांग की है कि केवल मिले हुए कैमरे की जांच तक मामला सीमित न रहे। अस्पताल के अन्य कक्षों और संवेदनशील स्थानों की भी जांच कराई जाए,ताकि यह पता चल सके कि कहीं और ऐसे उपकरण तो नहीं लगाए गए हैं। संदिग्ध कैमरा और मेमोरी कार्ड संबंधित अधिकारियों को सुरक्षित सौंप दिए गए हैं।

    BMO बोले- नियमों के तहत होगी कार्रवाई

ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ. नवीन मेहर ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में है और नियमों के तहत कानूनी एवं विभागीय कार्रवाई की जा रही है। अब जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि कैमरा किसने लगाया,उसका उद्देश्य क्या था और उसमें रिकॉर्ड हुआ डेटा कहां तक पहुंचा। मामले ने अस्पतालों में महिला कर्मचारियों की सुरक्षा और निजता को लेकर विभागीय व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

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