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भोपाल

कंप्यूटर योग्यता नहीं थी, 8 कर्मचारियों की सहायक ग्रेड-3 की पदोन्नति रद्द: कृषि संचालनालय ने भृत्य पद पर लौटाया

राजवाड़ा दर्पण
राजवाड़ा दर्पण
कंप्यूटर योग्यता नहीं थी, 8 कर्मचारियों की सहायक ग्रेड-3 की पदोन्नति रद्द: कृषि संचालनालय ने भृत्य पद पर लौटाया

सीपीसीटी और एक वर्षीय कंप्यूटर डिप्लोमा अनिवार्य; 9 जुलाई को मिली थी पदोन्नति, अब तत्काल प्रभाव से वापस फीडर कैडर में भेजने के आदेश

      भोपाल। किसान कल्याण तथा कृषि विकास संचालनालय ने सहायक ग्रेड-3 के पद पर पदोन्नत किए गए आठ कर्मचारियों की पदोन्नति तत्काल प्रभाव से निरस्त करते हुए उन्हें वापस भृत्य पद पर कार्य करने के निर्देश दिए हैं। संचालनालय के 6 अगस्त 2026 के आदेश में स्पष्ट किया गया है कि सहायक ग्रेड-3 पद के लिए निर्धारित अनिवार्य योग्यता पूरी नहीं होने के कारण यह कार्रवाई की गई है।

        आदेश के मुताबिक सामान्य प्रशासन विभाग के 1 जुलाई 2013 और 26 फरवरी 2015 के परिपत्रों के अनुसार सहायक ग्रेड-3 के लिए हायर सेकेंडरी के साथ एक वर्षीय कंप्यूटर डिप्लोमा और सीपीसीटी परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य है। सामान्य प्रशासन विभाग के 26 मई 2026 के स्पष्टीकरण और आयुक्त कोष एवं लेखा के 25 जुलाई 2026 के पत्र में भी साफ किया गया है कि सीपीसीटी से छूट का कोई प्रावधान या निर्देश जारी नहीं किया गया है।

     सीपीसीटी क्या है: सीपीसीटी यानी कंप्यूटर प्रोफिशिएंसी सर्टिफिकेशन टेस्ट मध्यप्रदेश में विभिन्न सरकारी लिपिकीय एवं कंप्यूटर आधारित पदों के लिए कंप्यूटर दक्षता प्रमाणित करने वाली परीक्षा है। इसमें कंप्यूटर संचालन, टाइपिंग और संबंधित डिजिटल कार्यों की दक्षता का परीक्षण किया जाता है। सहायक ग्रेड-3 जैसे पदों के लिए निर्धारित पात्रता में इसका विशेष महत्व है।

      दरअसल, विभागीय पदोन्नति समिति की 6 जुलाई की अनुशंसा के आधार पर 9 जुलाई 2026 के आदेश से चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों को सहायक ग्रेड-3 के पद पर स्थानापन्न रूप से पदोन्नत किया गया था। यह पद सातवें वेतनमान के ₹19,500-62,000, लेवल-4 में था। बाद में सामने आया कि पदोन्नत कर्मचारियों के पास निर्धारित एक वर्षीय कंप्यूटर डिप्लोमा और सीपीसीटी उत्तीर्ण प्रमाण-पत्र उपलब्ध नहीं हैं।

       कंप्यूटर योग्यता नहीं थी, 8 कर्मचारियों की सहायक ग्रेड-3 की पदोन्नति रद्द: कृषि संचालनालय ने भृत्य पद पर लौटाया - 2

पदोन्नति वापस लिए गए कर्मचारियों में मसूद कुरेशी, राजेन्द्र कुमार शर्मा, आशा देवी यादव, कमला यादव, प्रफुल्ल महाजन, कमलेन्द्र सिंह, विक्रम सिंह रावत और अभिलाषा कुमरे शामिल हैं। आदेश में सभी को तत्काल प्रभाव से फीडर कैडर भृत्य पद पर पूर्ववत कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं। आदेश 6 अगस्त से प्रभावशील किया गया है।

      क्या दूसरे विभागों में भी होगी जांच?

जानकारी के अनुसार,सहायक ग्रेड-3 के पद पर निर्धारित योग्यता और नियमों के विपरीत पदस्थापना को लेकर अन्य विभागों में भी शिकायतें भोपाल स्तर पर दर्ज होने की चर्चा है। बताया जा रहा है कि कुछ मामलों को लेकर समाचार पत्रों में भी खबरें प्रकाशित हो चुकी हैं। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या संबंधित विभागों में भी पदस्थापित कर्मचारियों की निर्धारित योग्यता और पदोन्नति प्रक्रिया की जांच होगी? साथ ही, यदि कहीं नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो क्या वहां भी कार्रवाई की जाएगी? भोपाल स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा इन शिकायतों पर संज्ञान लिए जाने की चर्चाएं भी हैं।

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