इंदौर। क्राइम ब्रांच में कार्रवाई से बचाने और युवक को छोड़ने के बदले 1.20 लाख रुपए रिश्वत मांगने के मामले में लोकायुक्त ने तत्कालीन क्राइम ब्रांच निरीक्षक, एक आरक्षक और दो निजी व्यक्ति के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम सहित संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया है। शिकायत के अनुसार रिश्वत की रकम में से 50,800 रुपए UPI के जरिए और शेष 70 हजार रुपए नकद लिए गए।
लोकायुक्त के मुताबिक तुलसी नगर निवासी प्रिती हजारी ने 2 अप्रैल 2026 को शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि उनके बेटे प्रांजल हजारी को एक शिकायत के सिलसिले में क्राइम ब्रांच कार्यालय बुलाया गया था। आरोप है कि मामले में कार्रवाई नहीं करने और बेटे को छोड़ने के बदले तत्कालीन निरीक्षक सुजीत श्रीवास्तव और अन्य पुलिसकर्मियों ने 1.20 लाख रुपए की मांग की।
पहले UPI से 50,800, फिर 70 हजार नकद
शिकायत के अनुसार 20 मार्च 2026 को 50,800 रुपए UPI के माध्यम से निजी व्यक्ति दीपक पटेल को ट्रांसफर करवाए गए। इसके बाद शेष 70 हजार रुपए अगले दिन नकद लिए जाने का आरोप है। शिकायतकर्ता ने लोकायुक्त को शिकायत के साथ तकनीकी साक्ष्य भी उपलब्ध कराए।
तकनीकी साक्ष्यों से शिकायत का सत्यापन
शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक राजेश सहाय के निर्देशन में शिकायत का सत्यापन कराया गया। तकनीकी साक्ष्यों की जांच में शिकायत सही पाए जाने के बाद लोकायुक्त ने 24 अगस्त को चारों आरोपियों के खिलाफ अपराध दर्ज किया।
आरोपियों में तत्कालीन क्राइम ब्रांच निरीक्षक सुजीत श्रीवास्तव, तत्कालीन आरक्षक विकास सेंधवा सिंह, ड्राइवर अभय सिंह निजी व्यक्ति दीपक पटेल शामिल हैं। मामला भ्रष्टाचार निवारण संशोधन अधिनियम 2018 की धारा 7 और बीएनएस 2023 की धारा 61(2) के तहत दर्ज कर विवेचना में लिया गया है।
लोकायुक्त पुलिस की कार्रवाई महानिदेशक योगेश देशमुख के भ्रष्टाचार के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के निर्देश और डीआईजी मनोज सिंह के मार्गदर्शन में की गई।