धार जिले के 275 छात्रावासों में हजारों विद्यार्थी, सुविधाओं के नाम पर सवाल; निसरपुर की घटना के बाद अधीक्षिका निलंबित, अब सभी हॉस्टलों के भौतिक सत्यापन की जरूरत
धार। आदिवासी अंचल के विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा और सुरक्षित आवास देने के लिए सरकार हर साल करोड़ों रुपए खर्च कर रही है, लेकिन कई छात्रावासों में मूलभूत सुविधाओं की स्थिति अब भी सवालों के घेरे में है। कहीं जर्जर भवनों में बारिश का पानी टपक रहा है तो कहीं विद्यार्थियों की संख्या के मुकाबले शौचालय कम हैं। बिजली, पानी, साफ-सफाई और भोजन की व्यवस्था को लेकर भी शिकायतें सामने आती रही हैं। हालात यह हैं कि विद्यार्थियों को अपनी समस्याएं बताने के लिए कई बार छात्रावास से बाहर निकलकर अधिकारियों तक पहुंचना पड़ रहा है।
धार जिले में जनजातीय विभाग के करीब 275 छात्रावास संचालित होने की जानकारी है। इनमें जूनियर, सीनियर और पोस्ट मैट्रिक स्तर के छात्रावास शामिल हैं। हजारों विद्यार्थी यहां रहकर पढ़ाई करते हैं। शासन की ओर से भोजन, रहन-सहन, स्टेशनरी और अन्य आवश्यक सुविधाओं के लिए राशि उपलब्ध कराई जाती है, इसके बावजूद जमीनी व्यवस्थाओं पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।
निसरपुर में रात को 40 छात्राएं निकलीं, थाने के सामने दिया धरना
हाल ही में निसरपुर के माता शबरी कन्या छात्रावास की घटना ने व्यवस्था की गंभीरता सामने ला दी। अव्यवस्थाओं से परेशान करीब 40 छात्राएं रात में छात्रावास से बाहर निकलकर कुक्षी पहुंचीं और थाने के सामने धरना देकर अपनी समस्याएं रखीं। घटना ने छात्राओं की सुरक्षा और छात्रावास की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए।
मामले की जानकारी मिलने पर जनजातीय विकास विभाग की सहायक आयुक्त मौके पर पहुंचीं। प्रारंभिक जांच में छात्रावास की अधीक्षिका बबीता चौहान की लापरवाही सामने आने पर उन्हें निलंबित किया गया। विभाग ने छात्रावास भवन पुराना होने और पर्याप्त सुविधाएं नहीं होने की बात भी कही। छात्राओं को दूसरे भवन में स्थानांतरित करने की बात सामने आई।
तिरला से सरदारपुर तक विरोध के मामले
छात्रावास और स्कूलों की व्यवस्थाओं को लेकर पिछले दिनों विरोध के अन्य मामले भी सामने आए। तिरला के सांदीपनि स्कूल से छात्राओं के पैदल धार पहुंचने का मामला सामने आया था। छात्राओं ने शिक्षिका पर जातिगत भेदभाव के आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की थी। सरदारपुर के मॉडल स्कूल से जुड़ा मामला भी चर्चा में रहा।
लगातार सामने आ रहे मामलों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि विद्यार्थियों को अपनी समस्या बताने के लिए सड़क या थाने तक क्यों पहुंचना पड़ रहा है? यदि अधिकारी नियमित निरीक्षण करें और शिकायतों का समय पर निराकरण हो तो ऐसी नौबत आने से पहले ही समस्याओं का समाधान हो सकता है।
एक ही जगह लंबे समय से जमे अधीक्षकों पर भी नजर जरूरी
छात्रावास की व्यवस्था में अधीक्षक की भूमिका सबसे अहम होती है। विद्यार्थियों की सुरक्षा, भोजन, साफ-सफाई, अनुशासन और मूलभूत सुविधाओं की निगरानी की जिम्मेदारी उन्हीं पर होती है। ऐसे में लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ अधीक्षकों की भूमिका और पदस्थापना की समीक्षा की जरूरत है।
नियमों के अनुसार अधीक्षक पद पर एक ही स्थान पर अधिकतम तीन वर्ष तक पदस्थ रहने के बाद स्थानांतरण की व्यवस्था होने की बात कही जाती है। इसके बावजूद कुछ छात्रावासों और आश्रमों में लंबे समय से एक ही स्थान पर कर्मचारियों के जमे होने की शिकायतें सामने आती रही हैं। विभाग को सभी पदस्थापनाओं का रिकॉर्ड जांचकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
14 हजार से ज्यादा विद्यार्थियों पर हर साल बड़ी राशि
जिले के छात्रावासों में करीब 14 हजार से अधिक विद्यार्थियों के रहने की जानकारी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार छात्राओं के लिए करीब 1,770 रुपए और छात्रों के लिए करीब 1,720 रुपए प्रतिमाह की दर से विभिन्न मदों में राशि का प्रावधान बताया गया है। प्रत्येक विद्यार्थी के लिए सालाना करीब 15,480 रुपए की राशि का भुगतान किए जाने की जानकारी है।
जब इतनी बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के लिए शासन राशि उपलब्ध करा रहा है, तब भवन, शौचालय, पानी, बिजली और भोजन जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी पर सवाल उठना स्वाभाविक है। जरूरत केवल बजट जारी करने की नहीं, बल्कि उसके सही इस्तेमाल और जमीनी निगरानी की भी है।
‘शुभ-लाभ’ के आरोपों की भी निष्पक्ष जांच हो
वार्डन और अधीक्षक की पदस्थापना को लेकर भी समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। स्थानीय स्तर पर कुछ पदस्थापनाओं में कथित आर्थिक लेन-देन के आरोप लगाए जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन यदि शिकायतें सामने आ रही हैं तो विभाग को निष्पक्ष जांच कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
क्योंकि किसी भी आर्थिक अनियमितता का असर सीधे विद्यार्थियों के भोजन, शिक्षा, स्वास्थ्य और सुविधाओं पर पड़ सकता है।
अब जिलेभर के छात्रावासों का भौतिक सत्यापन जरूरी
सरकार आदिवासी विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा और आवासीय सुविधा देने के लिए राशि खर्च कर रही है। ऐसे में जरूरत है कि जिले के सभी छात्रावासों का भौतिक सत्यापन कराया जाए। जर्जर भवनों की जांच, विद्यार्थियों के अनुपात में शौचालय, पेयजल और बिजली की उपलब्धता का आकलन किया जाए। साथ ही अधीक्षकों की पदस्थापना और कार्यप्रणाली की भी समीक्षा हो।