किसानों के आंदोलन के बाद सरकार ने लागू की हाइब्रिड व्यवस्था, सर्वर और ओटीपी की बाधा खत्म; खरीफ सीजन में समय पर मिलेगा उर्वरक
धार। खरीफ सीजन के बीच खाद वितरण को लेकर परेशान किसानों के लिए राहत भरी खबर है। प्रदेश सरकार ने उर्वरक वितरण की व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए हाइब्रिड मॉडल लागू कर दिया है। अब किसानों को खाद लेने के लिए ई-टोकन अनिवार्य नहीं रहेगा। किसान आधार कार्ड, मोबाइल नंबर और जमीन का खसरा दिखाकर भी सीधे खाद प्राप्त कर सकेंगे। सरकार जल्द ही नियमों में संशोधन कर इस व्यवस्था को स्थायी रूप देने की तैयारी में है।
प्रदेशभर में ई-टोकन व्यवस्था की तकनीकी खामियों के कारण किसान लंबे समय से परेशान थे। सर्वर बार-बार डाउन होने, मोबाइल पर ओटीपी नहीं आने और स्लॉट उपलब्ध नहीं होने से किसानों को कई-कई दिन इंतजार करना पड़ रहा था। समय पर खाद नहीं मिलने से सोयाबीन, मक्का, कपास सहित खरीफ फसलों की बढ़वार प्रभावित होने लगी थी।
किसानों के विरोध और आंदोलन के बाद सरकार ने तत्काल राहत देते हुए नई व्यवस्था लागू की है। अब किसान अपनी सुविधा के अनुसार नजदीकी प्राथमिक कृषि साख समिति (पैक्स), डबल लॉक उर्वरक वितरण केंद्र और अनुबंधित निजी उर्वरक दुकानों से खाद प्राप्त कर सकेंगे। जिन किसानों के पास ई-टोकन है, उन्हें उसी के आधार पर खाद मिलेगा, जबकि बिना ई-टोकन वाले किसानों को आधार, मोबाइल नंबर और खसरा के सत्यापन के बाद उर्वरक उपलब्ध कराया जाएगा।
जिला विपणन अधिकारी स्वाति राय ने बताया कि फिलहाल किसानों की सुविधा को देखते हुए यह राहत व्यवस्था लागू की गई है। जल्द ही उर्वरक वितरण संबंधी नियमों में संशोधन कर हाइब्रिड मॉडल को औपचारिक रूप से लागू किया जाएगा, ताकि भविष्य में तकनीकी कारणों से किसानों को खाद लेने में परेशानी न हो।
नई व्यवस्था के तहत किसानों को केवल तीन दस्तावेज—आधार कार्ड, मोबाइल नंबर और जमीन का खसरा—साथ रखना होगा। इनका सत्यापन होने के बाद सीधे खाद का वितरण किया जाएगा। किसानों का मानना है कि इससे लंबी कतारों, सर्वर की समस्या और ओटीपी की बाधा से राहत मिलेगी तथा खरीफ फसलों को समय पर खाद मिलने से उत्पादन पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा।