इंदौर। साइबर ठगी के लिए फर्जी सिम उपलब्ध कराने वाले नेटवर्क पर क्राइम ब्रांच ने बड़ी कार्रवाई की है। गृह मंत्रालय के भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र से मिली संदिग्ध सिम और विक्रेताओं की सूची के आधार पर जांच शुरू हुई तो दूधिया स्थित मोबाइल दुकान संचालक धर्मेंद्र अहिरवार की भूमिका संदिग्ध मिली। जांच में उसके द्वारा दस्तावेजों का दुरुपयोग कर कई सिम फर्जी तरीके से सक्रिय कराने की बात सामने आई।
क्राइम ब्रांच के अनुसार,संदिग्ध सिम की तकनीकी जानकारी का मिलान साइबर अपराध पोर्टल पर दर्ज शिकायतों से किया गया। इनमें से एक सिम का इस्तेमाल उत्तर प्रदेश में दर्ज दो साइबर अपराधों में पाया गया। दोनों मामलों में कुल 16 लाख 60 हजार 991 रुपए की वित्तीय ठगी सामने आई।
बिना जानकारी के सक्रिय कराए सिम
जांच में प्रथमदृष्टया सामने आया कि आरोपी ने संबंधित लोगों की जानकारी और सहमति के बिना उनके दस्तावेजों का इस्तेमाल कर बड़ी संख्या में सिम सक्रिय कराए। इसके बाद इन सिम का इस्तेमाल वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े साइबर अपराधों में किया गया।
पूछताछ में खुलेंगे और राज
पुलिस पूछताछ में आरोपी ने अन्य सिम भी फर्जी तरीके से सक्रिय कराने की जानकारी दी है। अब क्राइम ब्रांच इन सिम से जुड़े साइबर अपराध, बैंक खातों,वित्तीय लेन-देन और पूरे नेटवर्क की कड़ियां खंगाल रही है। पुलिस को आशंका है कि जांच आगे बढ़ने पर ठगी के और मामलों का खुलासा हो सकता है।
युवक गिरफ्तार, कई धाराओं में केस
26 वर्षीय धर्मेंद्र अहिरवार को उपलब्ध दस्तावेजों, तकनीकी साक्ष्यों और संदिग्ध सिम संबंधी जानकारी के आधार पर गिरफ्तार किया गया। उसके खिलाफ धारा 318(4) दूरसंचार अधिनियम की संबंधित धाराओं और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66(ग) के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच जारी है।