← वापस
भोपाल

लोकायुक्त की जांच पर अदालत की सख्ती: 38 क्लोजर रिपोर्ट लौटीं, भ्रष्टाचार मामलों में फिर होगी जांच  

राजवाड़ा दर्पण
राजवाड़ा दर्पण
लोकायुक्त की जांच पर अदालत की सख्ती: 38 क्लोजर रिपोर्ट लौटीं, भ्रष्टाचार मामलों में फिर होगी जांच

 

छह महीने में एक भी खत्मा आवेदन मंजूर नहीं, विशेष अदालत ने हर मामले में मांगी अतिरिक्त विवेचना; जांच की गुणवत्ता और निष्पक्षता पर उठे सवाल

   भोपाल। मध्य प्रदेश लोकायुक्त पुलिस की जांच प्रक्रिया एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। पिछले छह महीनों के दौरान भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में लोकायुक्त पुलिस द्वारा विशेष अदालतों में पेश किए गए 38 खत्मा (क्लोजर) आवेदन न्यायालय ने खारिज कर दिए। अदालत ने किसी भी मामले में क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार नहीं की और अधिकांश मामलों में अतिरिक्त जांच के निर्देश देते हुए उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई आगे बढ़ाने को कहा है।

न्यायालय के इस रुख ने लोकायुक्त पुलिस की विवेचना की गुणवत्ता, निष्पक्षता और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बड़ी संख्या में क्लोजर रिपोर्ट लगातार अदालतों से अस्वीकार हो रही हैं तो यह जांच प्रक्रिया में गंभीर कमियों का संकेत है। उनका मानना है कि भ्रष्टाचार जैसे संवेदनशील मामलों में साक्ष्य जुटाने और निष्पक्ष जांच की जिम्मेदारी जांच एजेंसी की होती है।

सूत्रों के अनुसार, कई मामलों में अदालत ने यह माना कि उपलब्ध दस्तावेज और परिस्थितियां विस्तृत जांच की मांग करती हैं। ऐसे में क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार करने के बजाय न्यायालय ने जांच आगे बढ़ाने के निर्देश दिए। इससे यह संदेश भी गया है कि भ्रष्टाचार के मामलों में बिना ठोस आधार के जांच बंद करने के प्रयास न्यायिक जांच की कसौटी पर टिक नहीं पा रहे हैं।

इस घटनाक्रम के बाद विपक्ष और सामाजिक संगठनों ने भी जांच एजेंसियों की जवाबदेही बढ़ाने की मांग तेज कर दी है। उनका कहना है कि यदि प्रभावशाली अधिकारियों या कर्मचारियों को राहत पहुंचाने के लिए कमजोर विवेचना या अधूरी जांच की जा रही है, तो इसकी स्वतंत्र समीक्षा होनी चाहिए। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

कानूनी जानकारों का मानना है कि विशेष अदालतों का यह रुख भविष्य में भ्रष्टाचार मामलों की जांच को और अधिक पारदर्शी एवं साक्ष्य आधारित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि लोकायुक्त पुलिस अदालत के निर्देशों के अनुसार दोबारा जांच कर क्या निष्कर्ष प्रस्तुत करती है और दोषियों के खिलाफ कितनी प्रभावी कार्रवाई हो पाती है।

खबरें और भी हैं...