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नई दिल्ली

लाल किले के पास 15 अगस्त पर चीलों को 1275 किलो चिकन खिलाकर रोकने की रणनीति!  

राजवाड़ा दर्पण
राजवाड़ा दर्पण
लाल किले के पास 15 अगस्त पर चीलों को 1275 किलो चिकन खिलाकर रोकने की रणनीति!

 

नई दिल्ली। 15 अगस्त को देश के ऐतिहासिक लाल किले पर स्वतंत्रता दिवस का भव्य समारोह आयोजित होने जा रहा है। इस दौरान आसमान में जब भारतीय वायुसेना के फाइटर जेट्स अपनी गर्जना के साथ नीचे उड़ान भरेंगे, तब उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक बेहद अनोखा और व्यावहारिक कदम उठाया गया है। वायुसेना और वन विभाग ने मिलकर लाल किला परिसर और विमानों के संभावित फ्लाइंग कॉरिडोर के आसपास चीलों को आकर्षित करने के लिए भोजन का खास प्रबंध किया है।

      इस पूरी योजना का मुख्य उद्देश्य आसमान में मंडराने वाली चीलों का ध्यान भटकाना है। अक्सर देखा जाता है कि स्वतंत्रता दिवस की फ्लाईपास्ट के दौरान लड़ाकू विमान काफी कम ऊंचाई पर उड़ान भरते हैं। ऐसे में चीलों के विमानों से टकराने यानी 'बर्ड स्ट्राइक' की गंभीर आशंका बनी रहती है, जो कि एक बड़े हादसे का कारण बन सकती है। इस जोखिम को पूरी तरह खत्म करने के लिए अधिकारियों ने चीलों को भगाने के बजाय जमीन पर ही उनके पसंदीदा भोजन का इंतजाम किया है।

आसमान से ध्यान हटाकर जमीन पर केंद्रित करने की तरकीब

     चीलें स्वाभाविक रूप से भोजन की तलाश में खुले स्थानों और ऊंचे आसमान में चक्कर लगाती हैं। इस व्यवहारिक चुनौती से निपटने के लिए वन विभाग ने वायुसेना के साथ तालमेल बिठाकर 4 विशेष फीडिंग पॉइंट्स चिह्नित किए हैं। इन जगहों पर पक्षियों के लिए चिकन के छोटे-छोटे टुकड़े फेंके जा रहे हैं। इसका सीधा असर यह होगा कि 15 अगस्त के दिन जब लड़ाकू विमान लाल किले के ऊपर से गुजरेंगे, तब चीलें आसमान में उड़ने के बजाय जमीन के पास भोजन करने में व्यस्त रहेंगी।

गणतंत्र दिवस पर मिली सफलता के बाद दोहराया जा रहा प्रयोग

      यह नया या अनजाना प्रयोग नहीं है। इस तरीके को इस साल 26 जनवरी यानी गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान भी सफलता के साथ आजमाया जा चुका है। उस समय भी फ्लाइंग कॉरिडोर को पूरी तरह पक्षी-मुक्त और सुरक्षित रखने के लिए लगभग 1275 किलो बोनलेस चिकन का उपयोग किया गया था। उस दौरान मिले सकारात्मक नतीजों को देखते हुए ही इस स्वतंत्रता दिवस पर भी सक्षम अधिकारियों से स्वीकृति मिलते ही काम समय रहते शुरू कर दिया गया है। तमाम तैयारियों का केवल एक ही अंतिम लक्ष्य है 15 अगस्त को लाल किले के ऊपर से गुजरने वाले फाइटर जेट्स की उड़ान बिल्कुल सुरक्षित रहे और इंसानी सुरक्षा के साथ-साथ इन बेजुबान पक्षियों को भी किसी प्रकार का नुकसान न पहुंचे।

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