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उज्जैन

महाकाल के पंचकोशी मार्ग पर हरियाली की छांव, 50 हजार बड़े पौधों से बनेगा ग्रीन कॉरिडोर

राजवाड़ा दर्पण
राजवाड़ा दर्पण
महाकाल के पंचकोशी मार्ग पर हरियाली की छांव, 50 हजार बड़े पौधों से बनेगा ग्रीन कॉरिडोर

सिंहस्थ-2028 से पहले 12 उपवन होंगे तैयार, अमलतास-गुलमोहर से सजेगा पंचकोशी पथ; श्रद्धालुओं को मिलेगी शीतल और सुंदर राह

  उज्जैन। सिंहस्थ-2028 को पर्यावरण के लिहाज से यादगार बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। महाकाल की नगरी के ऐतिहासिक पंचकोशी यात्रा मार्ग को ग्रीन कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जा रहा है। प्रशासन की योजना के तहत मार्ग पर करीब 50 हजार बड़े पौधे लगाए जाएंगे और 12 उपवन विकसित किए जाएंगे। उद्देश्य केवल मार्ग की खूबसूरती बढ़ाना नहीं, बल्कि सिंहस्थ के दौरान लाखों श्रद्धालुओं को हरियाली और छांव से भरपूर सुगम यात्रा उपलब्ध कराना है।

     कलेक्टर रौशन कुमार सिंह के मार्गदर्शन में चल रहे इस अभियान के तहत पंचकोशी मार्ग के विभिन्न हिस्सों में पौधारोपण और सौंदर्यीकरण का काम किया जा रहा है। मार्ग पर महाकाल के चित्रों वाले विशेष ट्री-गार्ड लगाए गए हैं, जिससे धार्मिक आस्था और पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी साथ-साथ नजर आएगा।

     महाकाल के पंचकोशी मार्ग पर हरियाली की छांव, 50 हजार बड़े पौधों से बनेगा ग्रीन कॉरिडोर - 2

अमलतास-गुलमोहर से बदलेगी तस्वीर

ग्रीन कॉरिडोर में स्थानीय जलवायु के अनुकूल और आकर्षक प्रजातियों को प्राथमिकता दी जा रही है। अमलतास, गुलमोहर, नीलमोहर और पलाश जैसे पेड़ मार्ग की हरियाली बढ़ाएंगे। इनके विकसित होने के बाद पंचकोशी मार्ग पर श्रद्धालुओं को गर्मी के दौरान भी अपेक्षाकृत शीतल वातावरण मिलने की उम्मीद है। प्रशासन की योजना है कि पौधों की देखभाल और संरक्षण पर भी लगातार निगरानी रखी जाए, ताकि सिंहस्थ के बाद भी यह हरित पट्टी शहर की पहचान बनी रहे।

      12 उपवन देंगे नया स्वरूप

पंचकोशी मार्ग पर प्रस्तावित 12 उपवन भी इस परियोजना का अहम हिस्सा हैं। इन स्थानों को श्रद्धालुओं के विश्राम और पर्यावरणीय सौंदर्य के लिहाज से विकसित किया जाएगा। इससे यात्रा मार्ग पर हरियाली के साथ छोटे-छोटे विश्राम स्थल भी तैयार होंगे। प्रशासन का मानना है कि इससे पंचकोशी यात्रा का धार्मिक अनुभव और बेहतर होगा।

        सड़कें भी होंगी मजबूत

ग्रीन कॉरिडोर के साथ पंचकोशी मार्ग से जुड़ी सड़कों और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने की योजना भी है। इसके लिए करोड़ों रुपए के बजट का प्रावधान किया गया है। विकास कार्यों में कनेक्टिंग सड़कों का सुदृढ़ीकरण और जनभागीदारी को भी शामिल किया गया है। प्रशासन का फोकस यह है कि सिंहस्थ के दौरान श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या को देखते हुए मार्ग पर यातायात, पैदल यात्रा और सुविधाओं का बेहतर प्रबंधन हो सके।

     महाकाल के पंचकोशी मार्ग पर हरियाली की छांव, 50 हजार बड़े पौधों से बनेगा ग्रीन कॉरिडोर - 3

सिंहस्थ के बाद भी रहेगी हरियाली

प्रशासन के अनुसार यह योजना केवल सिंहस्थ आयोजन तक सीमित नहीं है। पौधों और उपवनों के विकसित होने के बाद पंचकोशी मार्ग उज्जैन की स्थायी हरित पहचान का हिस्सा बन सकता है। कलेक्टर रौशन कुमार सिंह के अनुसार उद्देश्य सिंहस्थ को हरित, सुंदर और पर्यावरण-अनुकूल बनाना है, ताकि श्रद्धालुओं को सुगम यात्रा के साथ आध्यात्मिक और प्राकृतिक वातावरण भी मिल सके।

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