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उज्जैन

महाकाल की पहली शाही सवारी आज: रजत पालकी में नगर भ्रमण पर निकलेंगे अवंतिकानाथ, शिवमय होगी उज्जैन की फिजा  

राजवाड़ा दर्पण
राजवाड़ा दर्पण
महाकाल की पहली शाही सवारी आज: रजत पालकी में नगर भ्रमण पर निकलेंगे अवंतिकानाथ, शिवमय होगी उज्जैन की फिजा

 

लाखों श्रद्धालु करेंगे दर्शन, अनाम सेवकों की निस्वार्थ साधना से सजेगा आस्था का सबसे भव्य उत्सव

       उज्जैन। श्रावण-भाद्रपद मास के प्रथम सोमवार को विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर से भगवान महाकाल अपनी पारंपरिक रजत पालकी में विराजमान होकर नगर भ्रमण पर निकलेंगे। मान्यता है कि इस दिन अवंतिकानाथ अपनी प्रजा का हाल जानने स्वयं नगर भ्रमण करते हैं। इसी आस्था के चलते देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु महाकाल की एक झलक पाने के लिए सवारी मार्ग पर उमड़ पड़ते हैं। हर-हर महादेव के जयघोष, घंटों-घड़ियालों और डमरू की गूंज से पूरी धर्मनगरी शिवमय हो उठती है।

        महाकाल की शाही सवारी केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि उज्जैन की संस्कृति, आस्था और सामाजिक एकता का जीवंत प्रतीक है। सवारी मार्ग पर जगह-जगह पुष्पवर्षा, आकर्षक रंगोली, भजन-कीर्तन और स्वागत मंचों की भव्य तैयारियां की गई हैं। श्रद्धालु भगवान के दर्शन कर सुख, समृद्धि और मंगल की कामना करेंगे।

     इस भव्य आयोजन की सबसे खास बात वे अनाम सेवक हैं, जो वर्षों से बिना किसी प्रचार-प्रसार के महाकाल की सेवा में जुटे हैं। कोई सवारी मार्ग को रंगोलियों से सजाता है, कोई रजत पालकी का पुष्पों से अलौकिक श्रृंगार करता है, तो कई परिवार पीढ़ियों से पालकी को अपने कंधों पर उठाने की परंपरा निभा रहे हैं। वहीं, झांझ, नगाड़े और डमरू की मंगल ध्वनि पूरी सवारी को शिवभक्ति से सराबोर कर देती है।

       महाकाल की यह शाही सवारी केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि श्रद्धा, सेवा और सनातन परंपरा का ऐसा अद्भुत संगम है, जो हर वर्ष लाखों भक्तों को अपनी ओर आकर्षित करता है। जैसे ही रजत पालकी मंदिर से प्रस्थान करेगी, पूरी अवंतिका नगरी आस्था के महासागर में डूब जाएगी और महाकाल के जयघोष से वातावरण गूंज उठेगा। श्रद्धालुओं का मानना है कि महाकाल की इस दिव्य सवारी के दर्शन मात्र से जीवन धन्य हो जाता है।

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