धुले-नरडाना में 10 किमी ट्रैक तैयार, ट्रेन भी पहुंची; धार-बड़वानी समेत चार जिलों में जमीन अधिग्रहण अब भी सबसे बड़ी चुनौती
धार इंदौर-मनमाड़ रेल परियोजना को दो राज्यों में अलग-अलग रफ्तार मिल रही है। महाराष्ट्र में जहां परियोजना निर्माण के अगले चरण में पहुंच गई है, वहीं मध्यप्रदेश में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया ही सबसे बड़ी अड़चन बनी हुई है। महाराष्ट्र के धुले-नरडाना सेक्शन में करीब 14 किमी में से 10 किमी ट्रैक बिछाया जा चुका है और इस हिस्से में ट्रेन भी पहुंच चुकी है। दूसरी ओर मध्यप्रदेश में इंदौर, धार, खरगोन और बड़वानी में निजी, सरकारी और वन भूमि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया चल रही है।
महाराष्ट्र के धुले-नरडाना सेक्शन का काम अक्टूबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। धुले से नीमखेड़ी के बीच अन्य कार्यों को वर्ष 2027-28 तक पूरा करने की योजना है। महाराष्ट्र में निर्माण की गति तेज होने के बाद अब परियोजना की निगाहें मध्यप्रदेश पर टिक गई हैं।
चार जिलों से गुजरेगी रेल लाइन
मध्यप्रदेश में परियोजना का हिस्सा इंदौर, धार, खरगोन और बड़वानी से होकर गुजरेगा। चारों जिलों में जमीन की स्थिति अलग-अलग है। खरगोन में स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है। यहां धारा 20-ए के तहत अधिसूचना प्रकाशित हो चुकी है। आपत्तियों के निराकरण के बाद आगे की प्रक्रिया चल रही है। महेश्वर क्षेत्र में जमीन अधिग्रहण पूरा होना बाकी है। इसके बाद खरगोन मध्यप्रदेश का पहला जिला बन सकता है, जहां परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण पूरा होगा।
इंदौर में 15 हेक्टेयर वन भूमि भी बाकी
इंदौर में निजी और सरकारी जमीन के साथ करीब 15 हेक्टेयर वन भूमि की जरूरत है। वन भूमि हस्तांतरण के लिए रेलवे की ओर से वन विभाग को आवेदन किया जा चुका है। वन भूमि से जुड़े मामलों में स्वीकृतियों की प्रक्रिया होने के कारण यहां भी समय लग सकता है। धार में भी निजी और सरकारी जमीन के साथ वन भूमि का सर्वे किया जा रहा है।
बड़वानी में सबसे ज्यादा जमीन की जरूरत
परियोजना के लिए बड़वानी में 378.39 हेक्टेयर निजी, 133.394 हेक्टेयर सरकारी और 46.88 हेक्टेयर वन भूमि की जरूरत है। धार में 177 हेक्टेयर निजी, 31.88 हेक्टेयर सरकारी और 18.37 हेक्टेयर वन भूमि प्रस्तावित है। खरगोन में 36.84 हेक्टेयर निजी, 15.64 हेक्टेयर सरकारी और 31.17 हेक्टेयर वन भूमि की आवश्यकता है। इंदौर में 132.89 हेक्टेयर निजी, 15.13 हेक्टेयर सरकारी और करीब 15 हेक्टेयर वन भूमि की जरूरत बताई गई है।
जमीन के लिए 5774 करोड़ का प्रावधान
इंदौर-मनमाड़ रेल परियोजना की पहली घोषणा 2018-19 में हुई थी। शुरुआती लागत करीब 493 करोड़ रुपए बताई गई थी, लेकिन समय के साथ परियोजना का आकार और लागत दोनों बढ़े हैं। मौजूदा परियोजना में अकेले जमीन अधिग्रहण के लिए करीब 5774 करोड़ रुपए का प्रावधान बताया गया है। इससे स्पष्ट है कि भूमि अधिग्रहण परियोजना का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण हिस्सा है।
सितंबर 2024 में इंदौर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान तत्कालीन रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव वर्चुअली जुड़े थे और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में परियोजना को लेकर घोषणा हुई थी। बाद में इसे विशेष रेल परियोजना का दर्जा भी मिला। अब मध्यप्रदेश में निर्माण की गति इस बात पर निर्भर करेगी कि शेष जमीन रेलवे को कितनी जल्दी उपलब्ध कराई जाती है। महाराष्ट्र में ट्रेन ट्रैक तक पहुंच चुकी है, ऐसे में मध्यप्रदेश में जमीन अधिग्रहण की देरी परियोजना की समग्र रफ्तार पर असर डाल सकती है।